2023-24 में भारत का R&D व्यय बढ़कर 0.84% हुआ

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की “अनुसंधान एवं विकास सांख्यिकी 2025-26” रिपोर्ट के अनुसार, देश में अनुसंधान एवं विकास पर सकल व्यय में लगातार वृद्धि हुई है।

भारत का अनुसंधान एवं विकास पर व्यय वर्ष 2023-24 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 0.84 प्रतिशत तक पहुंच गया।  

आंकड़े भारत के नवाचार परिदृश्य में एक संरचनात्मक बदलाव को भी दर्शाते हैं। वर्ष 2021-22 में निजी उद्योगों का राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास व्यय में योगदान 45.5 प्रतिशत था, जो बढ़कर वर्ष 2023-24 में 51.8 प्रतिशत हो गया। यह पहली बार है जब भारत के अनुसंधान प्रयासों में व्यवसायों का योगदान सभी स्तरों की सरकारों के संयुक्त योगदान से अधिक हुआ है।

सरकारी क्षेत्र में शामिल हैं:

  • केंद्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों और संस्थानों द्वारा अनुसंधान एवं विकास पर किया गया व्यय।
  • राज्य सरकारों के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों तथा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों का व्यय।
  • सार्वजनिक क्षेत्र/संयुक्त क्षेत्र के उद्योगों का अनुसंधान एवं विकास व्यय।
  • सार्वजनिक उच्च शिक्षा संस्थानों का अनुसंधान एवं विकास व्यय।

निजी क्षेत्र में शामिल हैं:

  • निजी क्षेत्र के उद्योगों द्वारा अनुसंधान एवं विकास पर किया गया व्यय।
  • वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान संगठनों का व्यय।
  • निजी उच्च शिक्षा संस्थानों का अनुसंधान एवं विकास व्यय।

अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पहलें

सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद में अनुसंधान एवं विकास व्यय का हिस्सा बढ़ाने तथा अनुसंधान और नवाचार में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष: निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले, उच्च जोखिम वाले और रणनीतिक अनुसंधान को समर्थन देने के लिए ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान एवं विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी और निवेश को बढ़ावा देना है।

अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन:  अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना की गई है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से ₹14,000 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है। साथ ही, गैर-सरकारी स्रोतों से अतिरिक्त वित्त जुटाने का भी प्रावधान है।

राष्ट्रीय मिशन:  सरकार ने अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई राष्ट्रीय मिशन शुरू किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन — ₹6,003.65 करोड़ का बजटीय परिव्यय।
  • राष्ट्रीय अंतरविषयी साइबर-भौतिक प्रणाली मिशन — ₹3,660 करोड़ का बजटीय परिव्यय।
  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन — ₹76,000 करोड़ का बजटीय परिव्यय।
  • राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन

सार्वजनिक-निजी भागीदारी:  सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। राष्ट्रीय अंतरविषयी साइबर-भौतिक प्रणाली मिशन और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अंतर्गत प्रौद्योगिकी केंद्रों की स्थापना की जा रही है, ताकि सहयोगात्मक तकनीकी विकास को बढ़ावा मिल सके।

प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार कार्यक्रम:  भारत की अनुसंधान से नवाचार और फिर विनिर्माण तक की श्रृंखला को मजबूत करने के लिए कई कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं, जिनमें राष्ट्रीय नवाचार विकास एवं दोहन पहल (NIDHI), जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) के कार्यक्रम, रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (iDEX) और प्रौद्योगिकी उद्भवन एवं उद्यमी विकास कार्यक्रम 2.0 (TIDE 2.0) शामिल हैं।

CLICK HERE: UPSC (CSE) GS PRELIMS & MAINS CURRENT AFFAIRS BASED WEEKLY TEST (ENG & HINDI)

CLICK HERE FOR GS TIMES PRAHAR UPSC GS MAINS TEST SERIES 

दैनिक करेंट अफेयर्स क्विज़ (सभी परीक्षाओं के लिए) अभ्यास के लिए-यहां क्लिक करें

error: Content is protected !!