भारत की पहली स्वदेशी अफ़्रीकन स्वाइन फ़ीवर वैक्सीन

आईसीएआर–राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (ICAR-NIHSAD), भोपाल ने सूअरों के लिए भारत का पहला स्वदेशी MA-104 सेल लाइन आधारित जीवित क्षीण (Live Attenuated) अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) वैक्सीन विकसित किया है।

  • यह वैक्सीन MA-104 सेल लाइन में तैयार किए गए ASF वायरस (Genotype II) के कमजोर (Attenuated) रूप पर आधारित है, जिसमें विशेष जीन हटाए गए हैं।
  • यह पशु चिकित्सा अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उपयुक्त है।
  • यह वैक्सीन 8 सप्ताह से अधिक आयु के स्वस्थ सूअरों को दी जाती है।
  • खुराक (Dose): पहली बार 1 mL मांसपेशी (Intramuscular) में इंजेक्शन, 14 दिन बाद बूस्टर डोज दी जाती है। 

अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF)

  • अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) एक अत्यंत घातक सीमापार पशु रोग है, जो अफ्रीकी स्वाइन फीवर वायरस (ASFV) के कारण होता है।
  • यह रोग पालतू और जंगली दोनों प्रकार के सूअरों को प्रभावित करता है।
  • इसके प्रमुख लक्षण हैं—तेज बुखार,, शरीर के अंदर और बाहर रक्तस्राव (Hemorrhage), तथा मृत्यु दर 100% तक पहुँच सकती है।
  • इस बीमारी ने दुनिया भर में सूअर पालन उद्योग को भारी आर्थिक नुकसान पहुँचाया है। 

भारत में स्थिति

  • भारत में पहली बार वर्ष 2020 में इस रोग का पता चला।
  • इसके बाद यह कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में फैल गया।
  • इसके कारण—
    • बड़ी संख्या में सूअरों की मृत्यु हुई,
    • सूअर उत्पादन प्रभावित हुआ,
    • पशुओं की आवाजाही और व्यापार पर प्रतिबंध लगे,
    • तथा विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत के छोटे सूअर पालकों की आजीविका को भारी नुकसान हुआ।

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