एंड्रोमेडा आकाशगंगा में पिछले 50 करोड़ वर्षों के दौरान तारों के निर्माण में कमी आई

द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में नासा की हबल अंतरिक्ष दूरबीन से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग करते हुए पाया गया है कि निकटवर्ती एंड्रोमेडा आकाशगंगा में पिछले 50 करोड़ वर्षों के दौरान तारों के निर्माण में कमी आई है।

अध्ययन से पता चलता है कि पिछले 4 करोड़ वर्षों के दौरान तारों के निर्माण में यह गिरावट विशेष रूप से तेज हुई है।

एंड्रोमेडा को मेसियर 31 (एम31) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक सर्पिल आकाशगंगा है, जिसका आकार हमारी मिल्की वे आकाशगंगा के समान है।

पृथ्वी से लगभग 25 लाख प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित एंड्रोमेडा इतनी निकट है कि इसे अंधेरे आकाश वाले क्षेत्रों से बिना किसी उपकरण के नंगी आंखों से देखा जा सकता है।

इसकी अपेक्षाकृत निकटता खगोलविदों को इसके तारकीय समूहों का विस्तृत अध्ययन करने का अवसर प्रदान करती है। इससे वैज्ञानिकों को मिल्की वे जैसी आकाशगंगाओं के विकास को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।

तारों के निर्माण में गिरावट

पिछले शोधों से संकेत मिलता है कि लगभग 2 अरब वर्ष पहले एंड्रोमेडा में तारों के निर्माण की एक नाटकीय प्रक्रिया हुई थी।

संभावना है कि यह प्रक्रिया किसी अन्य आकाशगंगा के साथ अतीत में हुई अंतःक्रिया या विलय के कारण शुरू हुई थी।

इस घटना के बाद एंड्रोमेडा में तारों के निर्माण की दर में लगातार गिरावट आई है।

खगोलविद तारों के निर्माण की दर का आकलन इस आधार पर करते हैं कि प्रत्येक वर्ष कितनी मात्रा में गैस और धूल नए तारों में परिवर्तित होती है।

अध्ययन के अनुसार:

  • लगभग 50 करोड़ वर्ष पहले, एंड्रोमेडा में प्रति वर्ष लगभग एक सौर द्रव्यमान की दर से तारों का निर्माण होता था।
  • लगभग 4 करोड़ वर्ष पहले, यह दर घटकर लगभग आधे सौर द्रव्यमान प्रति वर्ष रह गई।
  • वर्तमान में यह दर और घटकर लगभग सूर्य के द्रव्यमान के पांचवें हिस्से प्रति वर्ष रह गई है।

एंड्रोमेडा के बारे में

एंड्रोमेडा, मिल्की वे के सबसे निकट स्थित प्रमुख सर्पिल आकाशगंगा है। इसलिए यह आकाशगंगाओं की संरचना और विकास के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक प्रयोगशाला है।

एंड्रोमेडा का अध्ययन खगोलविदों को मिल्की वे के इतिहास को समझने में मदद करता है। हमारी पृथ्वी स्वयं मिल्की वे के भीतर स्थित है, इसलिए अपनी ही आकाशगंगा का बाहर से अध्ययन करना संभव नहीं है।

एंड्रोमेडा ने डार्क मैटर के अध्ययन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

1960 के दशक में खगोलविद वेरा रुबिन और उनके सहयोगियों ने एंड्रोमेडा तथा उसकी सर्पिल भुजाओं के घूर्णन का अध्ययन किया।

उनके अवलोकनों से संकेत मिला कि कोई अदृश्य पदार्थ आकाशगंगा के भीतर मौजूद पदार्थ की गति को प्रभावित कर रहा था।

बाद में इस अज्ञात पदार्थ को डार्क मैटर (अंधकारमय पदार्थ) के नाम से जाना गया।

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