गुजरात विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया
गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च को बहुमत से ध्वनि मत के ज़रिए ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ (UCC) बिल पास कर दिया। यह बिल संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप, धर्म की परवाह किए बिना शादी, तलाक़, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों को नियंत्रित करने के लिए एक साझा क़ानूनी ढाँचा प्रस्तावित करता है। उत्तराखंड के बाद गुजरात अब इस संहिता को अपनाने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है।
समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026: मुख्य अंश
- संवैधानिक आधार: यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निर्देशक तत्व) के अनुरूप है, जो पूरे देश में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
- क्षेत्राधिकार: ‘गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026’ पूरे राज्य में और राज्य की क्षेत्रीय सीमाओं के बाहर रहने वाले गुजरात के निवासियों पर भी लागू होगी।
- समान कानूनी ढांचा: यह धर्म की परवाह किए बिना विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक साझा कानूनी ढांचा प्रस्तावित करता है।
प्रमुख प्रावधान और विशेषताएं
विधेयक के “उद्देश्यों और कारणों” में एक समान कानूनी ढांचा बनाने पर जोर दिया गया है। इसके कुछ कड़े प्रावधान इस प्रकार हैं:
- द्विविवाह पर रोक (Prohibition of Bigamy): यह कानून स्पष्ट रूप से द्विविवाह को प्रतिबंधित करता है। कोई भी व्यक्ति अपने जीवनसाथी के जीवित रहते हुए दूसरा विवाह नहीं कर सकता।
- विवाह की वैधता: विवाह तभी वैध माना जाएगा जब विवाह के समय किसी भी पक्ष का कोई जीवित जीवनसाथी न हो।
- लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationships): विधेयक में लिव-इन संबंधों का पंजीकरण (Registration) और उनके समापन के लिए औपचारिक प्रक्रियाओं को अनिवार्य बनाया गया है।
- अपवाद (Exceptions): यह कोड अनुसूचित जनजातियों (ST) और उन कुछ समूहों पर लागू नहीं होगा जिनके प्रथागत अधिकार संविधान के तहत संरक्षित हैं।


