गगन – भारत का स्वदेशी सैटेलाइट-आधारित ऑग्मेंटेशन सिस्टम
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने संयुक्त रूप से ‘गगन’ (GAGAN – GPS Aided GEO Augmented Navigation) प्रणाली को विकसित किया है। यह एक उपग्रह-आधारित संवर्धन प्रणाली (Satellite-Based Augmentation System – SBAS) है, जो रियल-टाइम (वास्तविक समय) सुधार और इंटीग्रिटी की जानकारी प्रदान करके जीपीएस (GPS) में सुधार करती है। इसकी अखंडता संबंधी जानकारी पायलटों को तब सचेत करती है जब कोई जीपीएस सिग्नल नेविगेशन के लिए अनुपयुक्त होता है।
गगन के बारे में
गगन परियोजना वर्ष 2015 से पूरी तरह से चालू है। इसने भारत को अमेरिका, यूरोप और जापान के साथ परिचालन योग्य (ऑपरेशनल) SBAS वाले देशों के एक चुनिंदा समूह में शामिल कर दिया है। आज, गगन भारतीय हवाई क्षेत्र में सुरक्षित विमान संचालन का समर्थन करता है और विमानन क्षेत्र से परे भी इसके कई अनुप्रयोग (एप्लीकेशन) हैं। यह भारत की स्वदेशी नेविगेशन क्षमता को मजबूत करता है और देश के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है।
इसकी नवीनतम उपलब्धि जून 2026 में सामने आई, जब नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने गगन (GAGAN) का उपयोग करके एक वाणिज्यिक जेट विमान पर भारत के पहले उपग्रह-आधारित लैंडिंग सिस्टम अप्रोच का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।
गगन (GAGAN) के प्रमुख घटक
गगन ग्राउंड स्टेशनों, संचार प्रणालियों और भू-स्थिर (जियोस्टेशनरी) उपग्रहों के एक एकीकृत नेटवर्क के माध्यम से काम करता है। इसके मुख्य तत्वों में शामिल हैं:
- भारतीय संदर्भ स्टेशन (INRES)
- भारतीय मास्टर नियंत्रण केंद्र (INMCC)
- भारतीय लैंड अपलिंक स्टेशन (INLUS)
- संचार नेटवर्क (Communication Networks)
- गगन पेलोड से लैस भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellites)
गगन (GAGAN) और नाविक (NavIC) में अंतर
गगन के साथ-साथ, भारत ने ‘नाविक’ (NavIC – Navigation with Indian Constellation) भी विकसित किया है, जो इसका स्वदेशी क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह सिस्टम है। दोनों में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
- प्रणाली का प्रकार: गगन उपग्रह-आधारित संवर्धन प्रणाली (SBAS) है जो सटीक विमान नेविगेशन और लैंडिंग के लिए जीपीएस सिग्नलों को बेहतर बनाता है, जबकि नाविक (NavIC) एक स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली है जो पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं प्रदान करती है।
- कवरेज क्षेत्र: गगन भारतीय उड़ान सूचना क्षेत्र (Indian Flight Information Region) में नागरिक उड्डयन का समर्थन करता है, जबकि नाविक का कवरेज क्षेत्र भारत और भारतीय सीमा से 1500 किमी दूर तक के क्षेत्र को कवर करता है।
गगन भूमध्यरेखीय क्षेत्र (equatorial region) के लिए प्रमाणित होने वाला दुनिया का पहला SBAS भी है, जो भारत को परिचालन उपग्रह-आधारित संवर्धन प्रणाली वाले दुनिया के चुनिंदा देशों में से एक बनाता है।
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