वित्त मंत्री ने ‘सेस’ लगाने के केंद्र के अधिकार का बचाव किया

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 25 मार्च को उपकर (Cess) और अधिभार (surcharge) वसूलने के केंद्र के अधिकार को दोहराते हुए कहा कि संविधान इसकी अनुमति देता है और केंद्र इस प्रावधान का उपयोग करना जारी रखेगा। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि पिछले छह वर्षों में, सरकार ने उपकर और अधिभार के माध्यम से जितनी राशि जुटाई थी, उसका 105% राज्यों पर खर्च किया है। यानी, उसका खर्च उसकी वसूली से अधिक रहा है।

वित्त मंत्री के तर्क और आंकड़े (2019-20 से 2024-25)

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि भले ही ये फंड सीधे साझा नहीं किए जाते, लेकिन केंद्र इन्हें राज्यों में ही विभिन्न योजनाओं के माध्यम से खर्च करता है।

  • कुल संग्रह: ₹15.14 लाख करोड़।
  • कुल व्यय: ₹15.97 लाख करोड़ (संग्रह का 105%)।
  • प्रमुख योजनाएं: समग्र शिक्षा, मिड-डे मील (पीएम पोषण), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन।

सेस और सरचार्ज: मुख्य अंतर

यद्यपि दोनों ही “कर पर कर” (Tax on Tax) हैं, लेकिन उनके उद्देश्य और उपयोग में अंतर होता है:

विशेषतासेस (Cess)सरचार्ज (Surcharge)
उद्देश्यकिसी विशिष्ट उद्देश्य (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य) के लिए लगाया जाता है।संघ के सामान्य उद्देश्यों के लिए लगाया गया अतिरिक्त कर।
उपयोगकेवल उसी कार्य के लिए खर्च किया जा सकता है जिसके लिए इसे लिया गया है।इसका उपयोग किसी भी सार्वजनिक व्यय के लिए किया जा सकता है।
साझाकरणराज्यों के साथ साझा करने वाले ‘डिविजिबल पूल’ का हिस्सा नहीं होता।राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता (अनुच्छेद 271)।

संवैधानिक स्थिति और अनुच्छेद 270 व 271

अनुच्छेद 270 (संशोधन 2000): इस संशोधन ने संसद द्वारा पारित कानूनों के तहत विशिष्ट उद्देश्यों के लिए लगाए गए सेस और अनुच्छेद 271 के तहत सरचार्ज को ‘विभाज्य पूल’ (Divisible Pool) से बाहर रखने को संवैधानिक मंजूरी दी।

विभाज्य पूल पर प्रभाव: चूंकि इन्हें राज्यों के साथ साझा करना अनिवार्य नहीं है, इसलिए आलोचकों का तर्क है कि इससे राज्यों को मिलने वाले कुल कर राजस्व का हिस्सा कम हो जाता है।

सेस टैक्स की विशेषताएं

सार्वजनिक हित: इसका उद्देश्य निश्चित और सार्वजनिक कल्याण के लिए होना चाहिए।

ईयरमार्किंग (Earmarking): करदाता सीधे लाभ का दावा नहीं कर सकता, लेकिन सरकार को उस पैसे को केवल उसी निर्धारित उद्देश्य के लिए खर्च करना चाहिए।

लगाने का अधिकार: सेस केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा लगाया जा सकता है।

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