प्रोसोपिस जूलिफ्लोरा (सीमी करुवेलम)
मद्रास उच्च न्यायालय ने 18 मार्च, 2026 को तमिलनाडु से विदेशी और आक्रामक प्रजाति प्रोसोपिस जूलिफ्लोरा (तमिल में ‘सीमी करुवेलम’) के उन्मूलन के लिए 34 निर्देशों का एक सेट जारी किया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संपत्ति के मालिक अपने क्षेत्रों में देशी (स्वदेशी) पौधे लगाने की इच्छा व्यक्त करते हैं, तो उन्हें उनकी पसंद के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
पृष्ठभूमि और प्रभाव:
- उत्पत्ति: यह प्रजाति दक्षिण अमेरिकी देशों से उत्पन्न हुई है और औपनिवेशिक काल के शुरुआती दिनों में ईंधन की लकड़ी (firewood) के रूप में उपयोग के लिए अन्य महाद्वीपों में लाई गई थी।
- प्रारंभिक उपयोग: शुरुआत में, इसने व्यक्तियों को जलाऊ लकड़ी प्रदान करने, औद्योगिक ईंधन के रूप में, ईंट भट्टों और चारकोल उद्योग में अपनी उपयोगिता सिद्ध की थी।
- पारिस्थितिक आपदा: हालांकि, समय के साथ यह पर्यावरण और पारिस्थितिकी के लिए एक आपदा साबित हुई है।
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ:
- उपजाऊ भूमि का विनाश: प्रोसोपिस जूलिफ्लोरा ने उपजाऊ भूमि, घास के मैदानों और जंगलों की काईदार व स्पंजी मिट्टी को नष्ट कर दिया है। इन पेड़ों के नीचे की जमीन बंजर भूमि में बदल गई है।
- स्वदेशी वनस्पतियों का विस्थापन: इस विदेशी प्रजाति ने स्थानीय और देशी वनस्पतियों को विस्थापित कर दिया है, जिससे जैव विविधता को भारी नुकसान पहुँचा है।


