लद्दाख में पहली बार ब्लैक-नेक्ड क्रेन महोत्सव आयोजित किया गया
लद्दाख में पहली बार ब्लैक-नेक्ड क्रेन महोत्सव आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य इस पक्षी के संरक्षण के महत्व और इसके हैबिटैट के संरक्षण में लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश की भूमिका को उजागर करना था। लद्दाख स्थित चांगथांग कोल्ड वाइल्डलाइफ सेंचुरी देश में ब्लैक-नेक्ड क्रेन का एकमात्र ब्रीडिंग क्षेत्र है।
- यह महोत्सव हाल के वर्षों में इस दिशा में पहली ऐसी पहल थी। इसका उद्देश्य देश और विदेश के संरक्षणवादियों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों को एक मंच प्रदान करना तथा इस संकटग्रस्त पक्षी के बारे में जागरूकता बढ़ाना था।
- ब्लैक-नेक्ड क्रेन को IUCN की रेड लिस्ट में ‘नियर थ्रीटेंड (Near-Threatened)’ श्रेणी में रखा गया है।
- विश्व में क्रेन की 15 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें ब्लैक-नेक्ड क्रेन विश्व की एकमात्र अल्पाइन क्रेन है।
- लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में त्सोकर (Tso Kar), हानले (Hanle) और अन्य आर्द्रभूमियाँ, जो समुद्र तल से लगभग 2,500 से 5,000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित हैं, भारत में इसके एकमात्र प्रजनन स्थल हैं।
- दुनिया में ब्लैक-नेक्ड क्रेन की कुल संख्या लगभग 16,000 है। यह मुख्य रूप से भारत, भूटान, नेपाल और चीन में पाई जाती है।
- इसके पारिस्थितिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए, लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद ब्लैक-नेक्ड क्रेन को आधिकारिक रूप से लद्दाख का राजकीय पक्षी घोषित किया गया।
- इससे पहले यह पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य का भी राजकीय पक्षी था।
- लद्दाख में ब्लैक-नेक्ड क्रेन को पवित्र पक्षी माना जाता है।
- गर्मियों में इसके प्रजनन के लिए लद्दाख आने को शुभ संकेत और शांति का प्रतीक माना जाता है।
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