वैज्ञानिकों ने उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर असामान्य ओज़ोन परत का पता लगाया
वैज्ञानिकों ने बंगाल की उत्तरी खाड़ी के ऊपर ऊपरी वायुमंडल में ओजोन की असामान्य रूप से उच्च सांद्रता का पता लगाया है। इस अप्रत्याशित खोज से शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद मिल रही है कि वायुधाराएँ समतापमंडल (Stratosphere) में ओजोन का परिवहन किस प्रकार करती हैं।
शोधकर्ता लंबे समय से यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि वायुमंडलीय परिसंचरण और गतिशील प्रक्रियाएँ भारतीय क्षेत्र के ऊपर समतापमंडल में ओजोन के वितरण को किस प्रकार प्रभावित करती हैं।
इसी उद्देश्य से भारत के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों ने देशव्यापी वायुमंडलीय रडार नेटवर्क, मौसम संबंधी गुब्बारों, उपग्रहों और उन्नत वायुमंडलीय मॉडलों से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग करके एक प्रयोग किया। इसका उद्देश्य पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में ओजोन की गति का विस्तृत चित्र प्रस्तुत करना था।
अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन (AGU) द्वारा प्रकाशित Earth and Space Science जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के निष्कर्षों से सर्दियों के दौरान भारतीय उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र के ऊपर समतापमंडलीय ओजोन के पुनर्वितरण के संबंध में मात्रात्मक प्रायोगिक प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
यह अध्ययन Phase-I NetRAD-ASMA अभियान के तहत किया गया। यह एक राष्ट्रव्यापी वैज्ञानिक कार्यक्रम है, जिसमें भारत के विभिन्न शोध संस्थानों ने मिलकर भाग लिया। इस अभियान का उद्देश्य पृथ्वी के वायुमंडल में होने वाली जटिल प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझना था।
ओजोन परत
ओजोन परत समतापमंडल में ओजोन की उच्च सांद्रता वाला क्षेत्र है, जो पृथ्वी की सतह से लगभग 15 से 35 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
ओजोन परत सूर्य से आने वाले हानिकारक पराबैंगनी (UV) विकिरण को अवशोषित करके पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है।
ओजोन क्षरण के प्रमुख कारण
मानव-निर्मित हैलोजन युक्त रसायनों को ओजोन क्षरण का प्रमुख कारण माना गया है। इन रसायनों को सामूहिक रूप से ओजोन-क्षयकारी पदार्थ (Ozone-Depleting Substances—ODSs) कहा जाता है। सबसे महत्वपूर्ण ODSs में क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) शामिल हैं।
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