संसद ने बैंकर्स बुक्स साक्ष्य विधेयक, 2026 पारित किया

राज्यसभा ने 9 अगस्त 2026 को बैंकर्स बुक्स साक्ष्य विधेयक, 2026 पारित कर दिया, जिससे औपनिवेशिक दौर के बैंकर्स बुक्स साक्ष्य अधिनियम 1891 को आधुनिक कानूनी ढाँचे से बदलने का रास्ता साफ हो गया।

  • लोकसभा इस विधेयक को पहले ही 5 अगस्त 2026 को पारित कर चुकी थी।
  • नए कानून का उद्देश्य न्यायिक कार्यवाही में बैंकों की पुस्तकों और रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने से संबंधित कानूनी व्यवस्था को आधुनिक बनाना है।

डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता

  • विधेयक की प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को स्पष्ट रूप से स्वीकार्य, वैध और कानूनी रूप से प्रवर्तनीय साक्ष्य के रूप में मान्यता दी गई है।
  • विधेयक तकनीकी रूप से तटस्थ कानूनी ढांचा प्रदान करता है, ताकि बैंकिंग रिकॉर्ड के स्वरूप में तकनीकी बदलाव के बावजूद कानून प्रभावी बना रहे।
  • किसी इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल प्रति को साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है, यदि:
    • वह संबंधित मूल प्रविष्टि या सूचना की सही प्रति हो;
    • वह मूल रिकॉर्ड को सटीक रूप से प्रदर्शित करती हो; या
    • वह मूल रिकॉर्ड से उचित तरीके से प्राप्त (appropriately derived) की गई हो।

डिजिटल रिकॉर्ड की विश्वसनीयता के लिए सुरक्षा उपाय

  • इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की शुचिता (Integrity) सुनिश्चित करने के लिए विधेयक में सुरक्षा उपाय निर्धारित किए गए हैं।
  • रिकॉर्ड में अनधिकृत बदलाव नहीं हुआ होना चाहिए।
  • बैंकिंग प्रणाली में छेड़छाड़ या ऐसी कोई अन्य घटना नहीं हुई होनी चाहिए, जिससे रिकॉर्ड की सटीकता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती हो।

‘विशेष कारण’ की परिस्थितियाँ

  • विधेयक में उन परिस्थितियों को भी निर्दिष्ट किया गया है, जिन्हें Special Cause माना जा सकता है।
  • इनमें ऐसी स्थिति शामिल है, जहाँ किसी बैंकिंग प्रविष्टि या सूचना की सटीकता अथवा प्रामाणिकता पर संदेह हो।
  • यदि रिकॉर्ड बनाए रखने की नियमित प्रक्रिया में बाधा या व्यवधान आने का संकेत मिले, तो इसे भी विशेष कारण माना जा सकता है।
  • यदि कोई बैंक अपनी पुस्तकों के निरीक्षण से संबंधित न्यायालय के आदेश का पालन करने में विफल रहता है, तो यह भी विशेष कारण की श्रेणी में आ सकता है। 
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, यह कानून उन परिस्थितियों में बैंक अधिकारियों को उपलब्ध वैधानिक संरक्षण को भी मजबूत करेगा, जब संबंधित बैंक उस न्यायिक कार्यवाही का पक्षकार न हो।

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