प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR)

तमिलनाडु के कलपक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक पहली क्रिटिकलिटी (First Criticality) हासिल की। यह उपलब्धि डॉ. होमी जे. भाभा के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

PFBR भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण का अग्रदूत (Forerunner) है। पहली क्रिटिकलिटी हासिल करने और इसके बाद विद्युत उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने से दूसरे चरण के विस्तार का मार्ग प्रशस्त होगा तथा भविष्य में तीसरे चरण की ओर बढ़ने में सहायता मिलेगी, जिससे भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

PFBR की प्रमुख विशेषताएँ

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBRs) भारत की दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा रणनीति का एक महत्वपूर्ण आधार हैं।

PFBR में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन तथा यूरेनियम-238 (U-238) ब्लैंकेट का उपयोग किया जाता है। यह रिएक्टर विखंडनीय प्लूटोनियम-239 (Pu-239) का उत्पादन करता है और इस प्रकार जितना ईंधन खपत करता है, उससे अधिक ईंधन का उत्पादन करने में सक्षम है।

यह भारत का पहला वाणिज्यिक फास्ट रिएक्टर है।

PFBR के रिएक्टर कोर को यूरेनियम-238 के ब्लैंकेट से घेरा गया है। तेज न्यूट्रॉन इस फर्टाइल पदार्थ (Fertile Material) को विखंडनीय प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित करते हैं। इससे रिएक्टर द्वारा उपभोग किए गए ईंधन से अधिक मात्रा में नया ईंधन तैयार किया जा सकता है।

भविष्य में रिएक्टर के ब्लैंकेट में थोरियम-232 (Th-232) के उपयोग की भी परिकल्पना की गई है। ट्रांसम्यूटेशन (Transmutation) की प्रक्रिया के माध्यम से थोरियम-232 को यूरेनियम-233 (U-233) में परिवर्तित किया जाएगा। यही ईंधन भारत के थोरियम-आधारित तीसरे चरण के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को शक्ति प्रदान करेगा।

भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम

भारत दीर्घकालिक ऊर्जा संप्रभुता (Energy Sovereignty) सुनिश्चित करने के लिए तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम पर काम कर रहा है। यह कार्यक्रम बंद ईंधन चक्र (Closed Fuel Cycle) पर आधारित है, जिसका उद्देश्य भारत के सीमित यूरेनियम संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना तथा देश के विशाल थोरियम भंडार का दोहन करना है।

चरण 1: PHWR आधारित परमाणु ऊर्जा

  • घरेलू रूप से उपलब्ध प्राकृतिक यूरेनियम का ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • इसका उपयोग दाबित भारी जल रिएक्टर (Pressurised Heavy Water Reactors—PHWRs) में किया जाता है।
  • प्रयुक्त ईंधन का पुनर्संसाधन (Reprocessing) करके उसमें से प्लूटोनियम प्राप्त किया जाता है।

चरण 2: Fast Breeder Reactors

  • पुनर्संसाधित Pu-239 को ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • FBRs में U-238 को आगे Pu-239 में परिवर्तित किया जाता है।
  • PFBR इसी दूसरे चरण का अग्रदूत है।

चरण 3: थोरियम आधारित परमाणु ऊर्जा

  • पर्याप्त FBR क्षमता स्थापित होने के बाद थोरियम का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा।
  • थोरियम-232 से U-233 का उत्पादन किया जाएगा।
  • प्रारंभ में ऐसे ब्रीडर रिएक्टर में Pu-239 को ड्राइवर ईंधन (Driver Fuel) के रूप में उपयोग किया जाएगा।
  • उत्पादित U-233 आगे तीसरे चरण के परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए ईंधन के रूप में काम करेगा।

संक्षेप में:
प्राकृतिक यूरेनियम → PHWR → Pu-239 → FBR → Th-232 → U-233 → थोरियम आधारित परमाणु ऊर्जा

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