4200 वर्ष पहले के जलवायु परिवर्तन का हड़प्पा सभ्यता के पतन में योगदान
सुर्ख़ियों में क्यों?
बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) के शोधकर्ताओं ने देवरिया ताल के अवसादी (Sediment) अभिलेखों का अध्ययन कर गढ़वाल हिमालय में अतीत की वनस्पति एवं जलवायु (हाइड्रोक्लाइमेट) में हुए परिवर्तनों का पुनर्निर्माण किया है। अध्ययन में यह प्रमाण मिला है कि लगभग 4,200 वर्ष पूर्व (4.2 ka Event) आए अचानक शुष्क (Dry) काल का संबंध भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून में आई कमजोरी से था, जिसने संभवतः हड़प्पा सभ्यता से जुड़े लोगों के पूर्व की ओर गंगा के मैदानों में प्रवास को प्रभावित किया।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
- अध्ययन के लिए गढ़वाल हिमालय स्थित देवरिया ताल से प्राप्त एक सुव्यवस्थित दिनांकित अवसादी कोर का विश्लेषण किया गया।
- कालक्रम निर्धारित करने हेतु ट्रापा (सिंघाड़ा) के बीज-आवरण (Seed Cases) से प्राप्त 10 एक्सेलेरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (AMS) रेडियोकार्बन डेट का उपयोग किया गया।
- अतीत की वनस्पति एवं जलवायु परिस्थितियों के पुनर्निर्माण के लिए परागकण (Pollen) एवं बीजाणुओं (Spores) का विश्लेषण किया गया।
- लगभग 4,250 कैलेंडर वर्ष पूर्व (cal yr BP) ओक/पाइन (Oak/Pine) अनुपात में अचानक वृद्धि दर्ज की गई। यह परिवर्तन लगभग 4,200 वर्ष पूर्व आए अल्पकालिक किंतु तीव्र शुष्क जलवायु चरण के साथ मेल खाता है।
- यह अवधि वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त “4.2 ka घटना (4.2 ka Event)” अर्थात् होलोसीन काल की एक प्रमुख जलवायु व्यवधान घटना से संबंधित है।
हड़प्पा सभ्यता से संबंध
- अध्ययन के अनुसार, भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून (ISM) के कमजोर पड़ने से उत्तर-पश्चिम भारत की जलवायु एवं जल संसाधन प्रभावित हुए।
- सिंधु एवं घग्गर-हकरा नदी प्रणालियों पर निर्भर समुदायों के लिए नदी प्रवाह तथा मौसमी बाढ़ कम विश्वसनीय हो गई।
- थार मरुस्थल के किनारों पर मौसमी बाढ़ के समाप्त होने से कृषि एवं बसावट के लिए अनुकूल परिस्थितियां कम हो गईं।
- परिणामस्वरूप, लोगों ने अपेक्षाकृत अधिक अनुकूल कृषि एवं जल उपलब्धता वाले पूर्वी गंगा के मैदानों की ओर प्रवास किया।
- इस प्रकार, शोधकर्ता 4.2 ka जलवायु परिवर्तन को हड़प्पा सभ्यता के भौगोलिक संकुचन एवं उसके रूपांतरण का एक महत्वपूर्ण कारण मानते हैं।
4.2 ka घटना (4.2 ka Event) क्या है?
- 4.2 ka घटना लगभग 4,200 वर्ष पूर्व घटित एक अचानक वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Abrupt Climatic Shift) थी।
- यह विश्व के अनेक क्षेत्रों में अधिक शुष्कता (Aridity) तथा जलवायु अस्थिरता (Climatic Instability) से जुड़ी मानी जाती है।
- भारतीय उपमहाद्वीप में इस अवधि के दौरान मानसून की तीव्रता तथा जलवायु-जल संसाधन (Hydroclimatic Conditions) में हुए परिवर्तनों ने कृषि, नदी प्रणालियों तथा मानव बस्तियों पर गहरा प्रभाव डाला।
- ‘4.2 ka event’ (4.2 ka परिघटना) का मतलब है जलवायु में अचानक आया वह बदलाव जो लगभग 4,200 साल पहले हुआ था और इसी के साथ ‘मेघालय युग’ (Meghalayan Age) की शुरुआत हुई थी। यह ‘होलोसीन युग’ (Holocene Epoch) का सबसे हालिया उप-विभाजन है; होलोसीन युग की शुरुआत आखिरी ‘हिम युग’ (Ice Age) के बाद लगभग 11,700 साल पहले हुई थी।
- ‘मेघालय युग’ पृथ्वी के इतिहास के पिछले 4,200 वर्षों को दर्शाता है—एक ऐसा समय जब दुनिया के कई हिस्सों में सूखापन बढ़ा और जलवायु में अस्थिरता आई। इसके प्रमाण चेरापूंजी (मेघालय) के पास स्थित ‘मावमलुह गुफा’ (Mawmluh Cave) में मिले, जो पृथ्वी पर सबसे अधिक बारिश वाले स्थानों में से एक है।
- भारतीय उपमहाद्वीप में, मानसून की तीव्रता और जल-जलवायु संबंधी स्थितियों में आए बदलावों ने कृषि, नदी प्रणालियों और मानव बस्तियों को काफी हद तक प्रभावित किया होगा।
Source: PIB
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