वेनेज़ुएला ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट से हटने की घोषणा की
वेनेजुएला के विदेश मंत्री ने कहा कि देश ने औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court: आईसीसी) से हटने के अपने “अपरिवर्तनीय” निर्णय की सूचना दे दी है। आईसीसी वेनेजुएला के सशस्त्र बलों के सदस्यों और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कई वर्षों से जांच कर रहा था।
दिसंबर से ही वेनेजुएला के इस कदम की संभावना जताई जा रही थी। उस समय वेनेजुएला की राष्ट्रीय सभा ने एक कानून को निरस्त करने के पक्ष में मतदान किया था, जिसने रोम संविधि की पुष्टि की थी। यह मतदान अमेरिका द्वारा पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाए जाने से एक महीने पहले हुआ था और इससे अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय से अलग होने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की स्थापना युद्ध अपराधों, मानवता के विरुद्ध अपराधों, नरसंहार और आक्रामकता के अपराध के मामलों में उन व्यक्तियों पर मुकदमा चलाने के लिए की गई है, जब संबंधित सदस्य देश स्वयं ऐसा करने के इच्छुक या सक्षम नहीं होते हैं। न्यायालय वेनेजुएला में मानवता के विरुद्ध कथित अपराधों की जांच कर रहा था।
वर्ष 2020 में आईसीसी ने कहा था कि यह मानने के लिए उचित आधार मौजूद हैं कि वेनेजुएला में कम से कम वर्ष 2017 से नागरिक अधिकारियों, सशस्त्र बलों के सदस्यों और सरकार समर्थक व्यक्तियों ने मानवता के विरुद्ध अपराध किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) के बारे में
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय उन व्यक्तियों के खिलाफ जांच करता है और, जहां उचित आधार हो, मुकदमा चलाता है, जिन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए सबसे गंभीर अपराधों का आरोप है। इनमें नरसंहार, युद्ध अपराध, मानवता के विरुद्ध अपराध और आक्रामकता का अपराध शामिल हैं।
आईसीसी एक अंतिम उपाय के न्यायालय (As a court of last resort) के रूप में कार्य करता है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय न्यायालयों का स्थान लेना नहीं, बल्कि उनकी भूमिका को पूरक बनाना है।
यह न्यायालय रोम संविधि नामक एक अंतरराष्ट्रीय संधि द्वारा संचालित होता है।
आईसीसी संयुक्त राष्ट्र का संगठन नहीं है, लेकिन इसका संयुक्त राष्ट्र के साथ सहयोग समझौता है। जब कोई मामला न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है, तब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद उस मामले को आईसीसी के पास भेजकर उसे अधिकार क्षेत्र प्रदान कर सकती है। ऐसा दारफुर (सूडान) और लीबिया के मामलों में किया गया है।
भारत और आईसीसी
भारत अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का पक्षकार नहीं है, क्योंकि उसने रोम संविधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। भारत की प्रमुख चिंताओं में राष्ट्रीय संप्रभुता, रोम संविधि में आतंकवाद को अपराध के रूप में शामिल न किया जाना तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की शक्तियां शामिल हैं।
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