पीएम मोदी ने कश्मीर की पारंपरिक ‘वागु चटाई’ और त्रिपुरा की ‘चोंगप्रेन्ग’ वाद्य यंत्र के कायाकल्प पर बल दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई को कश्मीर की पारंपरिक ‘वागु’ (Vagu) चटाई के पुनरुद्धार की सराहना की। उन्होंने सदियों पुरानी इस हस्तकला को संरक्षित करने और संधारणीय तथा पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने में स्थानीय कारीगरों के प्रयासों को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी को संबोधित करते हुए कहा कि पारंपरिक रूप से हाथ से बुनी जाने वाली इस चटाई का पुनरुत्थान दर्शाता है कि प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित किया जा सकता है।
एक चटाई को तैयार करने में दो कारीगरों को लगभग चार दिन का समय लगता है। यह चटाई अनूठी होने के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल भी है। इसकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह गर्मियों में ठंडक और सर्दियों में गर्माहट प्रदान करती है।
चोंगप्रेंग वाद्य यंत्र
प्रधानमंत्री ने भारत की पारंपरिक संगीत विरासत की समृद्ध विविधता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने त्रिपुरा के पारंपरिक तार वाद्य यंत्र ‘चोंगप्रेंग’ (Chongpreng) के पुनरुद्धार के प्रयासों की सराहना की और लोगों से स्वदेशी संगीत परंपराओं को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
चोंगप्रेंग त्रिपुरा के जनजातीय समुदायों के बीच काफी लोकप्रिय है। बांस से निर्मित इस वाद्य यंत्र में तीन तार होते हैं। इससे निकलने वाली मधुर धुन सरोद से मिलती-जुलती है।
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