कवल टाइगर रिजर्व  बाघों के पुनर्वास के लिए ‘प्राथमिकता प्राप्त स्थल’ के रूप में चिन्हित

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने तेलंगाना स्थित कवल टाइगर रिजर्व (Kawal Tiger Reserve) को बाघों के पुनर्वास के लिए ‘प्राथमिकता प्राप्त स्थल’ के रूप में चिन्हित किया है। NTCA ने इसे उन टाइगर रिजर्वों में शामिल किया है, जहाँ वैज्ञानिक मूल्यांकन और नियोजित रणनीति के आधार पर बाघों के पुनर्प्रवेश या बाघों की संख्या बढ़ाने  पर विचार किया जा सकता है।

यह सिफारिश जून 2026 में NTCA और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा संयुक्त रूप से जारी ‘भारत में बाघों के सक्रिय प्रबंधन के लिए रोडमैप’ का हिस्सा है।

अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) में कवल टाइगर रिजर्व में कोई स्थायी बाघ दर्ज नहीं किया गया। इसे पारिस्थितिक पुनर्बहाली की निरंतरता के चरण-1 — पर्यावास और शिकार-प्रजातियों की पुनर्बहाली में रखा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस रिजर्व में ऐतिहासिक रूप से बाघों की मौजूदगी रही है और पड़ोसी स्रोत आबादियों से बाघों का प्रसार  अभी भी होता रहता है, लेकिन यहाँ बाघों की कोई स्थायी आबादी मौजूद नहीं है।

रिपोर्ट में कवल की बाघ आबादी को ‘अनुपस्थित’ बताया गया है, जबकि यहाँ शिकार-आधार (Prey Base) और पर्यावास की गुणवत्ता (Habitat Quality) दोनों को कमजोर (Depressed) बताया गया है। शिकार-प्रजातियों की कम उपलब्धता और खंडित पारिस्थितिक संपर्क को व्यवहार्य बाघ आबादी की पुनर्बहाली में प्रमुख बाधाओं के रूप में चिन्हित किया गया है।

कवल टाइगर रिजर्व में उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन, सागौन-प्रधान वन क्षेत्र), बाँस के क्षेत्र  और नदी-तटीय पर्यावास पाए जाते हैं।

यह रिजर्व मध्य भारत और पूर्वी घाट की बाघ आबादियों के बीच एक रणनीतिक भौगोलिक स्थिति में स्थित है। यह महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच खंडित वन गलियारों के माध्यम से ताडोबा-अंधारी लैंडस्केप  से भी जुड़ा हुआ है।

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