अंटार्कटिक आइसफिश – दुनिया का एकमात्र ज्ञात कशेरुकी जीव जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं नहीं होती

अंटार्कटिक आइसफिश Channichthyidae परिवार की मछलियाँ हैं, जो अंटार्कटिका के आसपास स्थित अत्यधिक ठंडे दक्षिणी महासागर (Southern Ocean) में पाई जाती हैं।

  • ये दुनिया के एकमात्र ज्ञात कशेरुकी (Vertebrates) हैं, जिनमें वयस्क अवस्था में हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) नहीं होता। इसलिए इनके रक्त में लाल रक्त कोशिकाएँ (Red Blood Cells) नहीं होतीं और इनका रक्त रंगहीन (Colourless) होता है।
  • कुछ प्रजातियों में मायोग्लोबिन (Myoglobin) भी नहीं होता, जो सामान्यतः मांसपेशियों में ऑक्सीजन को संग्रहित करने वाला प्रोटीन है।
  • Journal of Experimental Biology (2006) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, हीमोग्लोबिन का समाप्त होना आनुवंशिक उत्परिवर्तन (Genetic Mutation) के कारण हुआ।
  • हीमोग्लोबिन न होने के कारण, आइसफिश का रक्त सामान्य लाल रक्त वाली मछलियों की तुलना में 10% से भी कम ऑक्सीजन वहन कर पाता है।

आइसफिश के विशेष अनुकूलन 

ऑक्सीजन की कमी की भरपाई के लिए आइसफिश में कई विशेष अनुकूलन विकसित हुए हैं—

  • इनका हृदय (Heart) समान आकार की अन्य मछलियों की तुलना में 4–5 गुना बड़ा होता है।
  • इनके शरीर में रक्त की मात्रा (Blood Volume) लगभग 4 गुना अधिक होती है।
  • इनकी रक्त वाहिकाएं (Blood Vessels) अधिक चौड़ी होती हैं, जिससे कम ऑक्सीजन वाले रक्त का संचार अधिक प्रभावी ढंग से हो पाता है।
  • हालांकि, इन अनुकूलनों के कारण रक्त पंप करने में लगभग दोगुनी ऊर्जा खर्च होती है।

ये जीवित कैसे रहती हैं?

  • दक्षिणी महासागर का पानी अत्यधिक ठंडा होने के कारण उसमें घुली हुई ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) की मात्रा बहुत अधिक होती है।
  • आइसफिश रक्त प्लाज़्मा (Blood Plasma) और बिना शल्क (Scales) वाली त्वचा के माध्यम से भी सीधे ऑक्सीजन अवशोषित कर सकती हैं।
  • इसलिए इन्हें ऑक्सीजन के परिवहन के लिए हीमोग्लोबिन पर बहुत कम निर्भर रहना पड़ता है।

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