भारत में पहली बार पैरेट बोर्नावायरस 4 (PaBV-4) की पहचान की गई
वैज्ञानिकों की एक टीम ने, भारत में पहली बार, पैरट बोर्नावायरस 4 (PaBV-4) की पहचान और उसका आनुवंशिक वर्गीकरण (genetically characterised) किया है। यह वायरस पिंजरों या कैद में रखे गए सिटासिन (psittacine) पक्षियों में अक्सर तेजी से होने वाली मौत का कारण बनता है, जिससे विदेशी पालतू जीवों (exotic pets) के स्वास्थ्य और संकटग्रस्त तोते की प्रजातियों के संरक्षण को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
सिटासिन (Psittacine), जिसका अर्थ तोते से संबंधित या उसके जैसा होना है, पक्षियों के ‘सिटासिडे’ (Psittacidae) परिवार और ‘सिटासिफोर्मेस’ (Psittaciformes) गण (order) को दर्शाता है। इसमें बजरीगर (budgerigars), कॉकटेल (cockatiels), काकातुआ (cockatoos), लवबर्ड्स (lovebirds), मकाऊ (macaws) और पैराकीट्स (parakeets) शामिल हैं।
वैज्ञानिकों ने इस वायरस की सफलतापूर्वक पहचान और इसका आनुवंशिक वर्गीकरण किया है, जो पक्षी स्वास्थ्य अनुसंधान (avian health research) के लिए एक महत्वपूर्ण प्रगति है। इसके साथ ही इसने पक्षी मालिकों, प्रजनकों (breeders) और वन्यजीव संरक्षणवादियों के लिए नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज पक्षियों की बीमारियों की बेहतर निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करती है, विशेष रूप से विदेशी पालतू पक्षियों और प्रजनन केंद्रों (breeding facilities) के भीतर।
यह वायरस मुख्य रूप से प्रोवेंट्रिकुलर डिलेटेशन डिजीज (PDD) से जुड़ा है, जो एक गंभीर तंत्रिका संबंधी (neurological) और पाचन संबंधी विकार है। यह बीमारी पक्षी की भोजन को पचाने की क्षमता को प्रभावित करती है।
CLICK HERE: UPSC (CSE) GS PRELIMS & MAINS CURRENT AFFAIRS BASED WEEKLY TEST (ENG & HINDI)
CLICK HERE FOR GS TIMES PRAHAR UPSC GS MAINS TEST SERIES
दैनिक करेंट अफेयर्स क्विज़ (सभी परीक्षाओं के लिए) अभ्यास के लिए-यहां क्लिक करें



