वैज्ञानिकों ने हिमालयी पैंगोलिन को एक अलग प्रजाति के तौर पर पुष्टि की है
शोधकर्ताओं ने पुन: पुष्टि करते हुए यह निष्कर्ष निकाला है कि हिमालयी पैंगोलिन (Manis aurita) एक अलग और वर्तमान में जीवित (extant) प्रजाति है, जो चीनी पैंगोलिन (Manis pentadactyla) से पूरी तरह भिन्न है।
अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने इन निष्कर्षों को ‘कम्युनिकेशंस बायोलॉजी’ नामक पत्रिका में प्रकाशित किया है। उन्होंने व्यापक जीनोमिक (आनुवंशिक) और रूपात्मक (morphological) साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है।
दशकों से, हिमालयी पैंगोलिन को चीनी पैंगोलिन की ही एक उपप्रजाति माना जाता था। ऐतिहासिक रूप से, M. pentadactyla की तीन उपप्रजातियां पहचानी जाती थीं: M. p. pentadactyla लिनिअस, M. p. pusilla एलेन और M. p. aurita हॉजसन। मूल नमूने (1836 के लेक्टोटाइप) की सीक्वेंसिंग करके और आधुनिक डेटा के साथ उसकी तुलना करके, वैज्ञानिकों ने पाया कि लगभग 1.8 मिलियन (18 लाख) वर्ष पहले शुरुआती प्लीस्टोसीन युग के दौरान दोनों प्रजातियों के अलग होने में जलवायु परिवर्तन ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
चीनी पैंगोलिन के विपरीत, जिसे दक्षिणी चीन के समुद्री प्रभाव वाले जंगलों में एक स्थिर जलवायु सुरक्षा कवच मिला, हिमालयी क्षेत्र ने एक सीमित दायरा और गंभीर पर्यावास स्थल अस्थिरता पैदा की, जिससे M. aurita (हिमालयी पैंगोलिन) लंबे समय तक होने वाली पर्यावरण क्षरण के प्रति विशिष्ट रूप से संवेदनशील हो गया। इस प्रजाति का वितरण दक्षिणी हिमालय की तलहटी तक ही सीमित है, जिसकी प्रमाणित आबादी नेपाल, दक्षिणी तिब्बत और असम राज्य सहित पूर्वोत्तर भारत में पाई जाती है।
पैंगोलिन के बारे में
पैंगोलिन (ऑर्डर फोलीडोटा) एक मध्यम आकार का स्तनधारी जीव है जो केवल अफ्रीका और एशिया में पाया जाता है।
पैंगोलिन के केराटिन से बने शल्क (scales/पपड़ी) उन्हें अद्वितीय बनाते हैं, लेकिन यही शल्क उनके विनाश का कारण भी बन गए हैं। पैंगोलिन का अवैध शिकार उनके शल्कों के लिए किया जाता है, जिससे वे दुनिया में सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले स्तनधारी जीव बन गए हैं।
ये एकांतप्रिय और मुख्य रूप से निशाचर जीव हैं। अपने पसंदीदा आहार के कारण इन्हें ‘शल्की चींटीखोर’ (scaly anteaters) भी कहा जाता है। अपने मांस और शल्कों के लिए पैंगोलिन दुनिया में सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले स्तनधारी हैं—जिसकी मांग मुख्य रूप से एशिया में और बढ़ती मात्रा में अफ्रीका में है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा वर्तमान में पैंगोलिन की आठ प्रजातियों को मान्यता दी गई है।
पैंगोलिन की सभी आठ प्रजातियाँ ‘वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन’ (CITES) के परिशिष्ट I के तहत सूचीबद्ध हैं, और इन्हें ‘उद्विकासीय रूप से विशिष्ट और वैश्विक रूप से लुप्तप्राय’ (EDGE) प्रजातियों के रूप में मान्यता प्राप्त है।
इनमें से चार प्रजातियाँ एशिया में पाई जाती हैं: भारतीय पैंगोलिन (Manis crassicaudata), फिलीपीन पैंगोलिन (Manis culionensis), सुंडा पैंगोलिन (Manis javanica), और चीनी पैंगोलिन (Manis pentadactyla)।
भारत में पैंगोलिन की दो प्रजातियां प्राप्त होती हैं: भारतीय पैंगोलिन (Manis crassicaudata) और चीनी पैंगोलिन (Manis pentadactyla)।
Sources: DTE & कम्युनिकेशंस बायोलॉजी
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