त्रिपुरा सारिंदा वाद्य यंत्र को जीआई टैग प्राप्त हुआ

त्रिपुरा की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर ‘त्रिपुरा सारिंदा’ (Tripura Sarinda) को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication – GI) टैग प्रदान किया गया है। राज्य के देशज समुदायों से गहराई से जुड़ा यह तंतु वाद्य यंत्र (stringed musical instrument) अपनी अनूठी शिल्पकारी और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है।

GI टैग प्राप्त होने से त्रिपुरा की लोक परंपराओं को संरक्षित और बढ़ावा देने में मदद मिलने की उम्मीद है, साथ ही यह इस वाद्य यंत्र को व्यापक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाएगी। इसके माध्यम से सारिंदा बनाने और इसे संरक्षित करने वाले कारीगरों के लिए आजीविका के अवसर भी सुधरने की संभावना है, क्योंकि यह इसकी प्रामाणिकता की रक्षा करेगा और बाजार में इसके मूल्य को बढ़ाएगा।

इस मान्यता के साथ, अब त्रिपुरा में GI-टैग वाले उत्पादों की संख्या चार हो गई है। अन्य उत्पाद हैं: त्रिपुरा क्वीन अनानास (Tripura Queen Pineapple); रिसा (Risa) और पचरा (रिग्नई) (Pachra/Rignai), तथा माताबाड़ी पेड़ा (Matabari Peda)।

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