भारत और जापान ने जॉइंट क्रेडिटिंग मैकेनिज़्म के लिए कार्यान्वयन के नियम अपनाए

भारत और जापान ने जलवायु कार्रवाई, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और सतत विकास की पहलों पर सहयोग बढ़ाने के लिए पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत ‘जॉइंट क्रेडिटिंग मैकेनिज्म’ (JCM) के कार्यान्वयन नियमों (Rules of Implementation) को अपनाया है। 

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, यह कार्यान्वयन नियम इस वर्ष 8 जून को अपनाए गए हैं, जो ‘जॉइंट क्रेडिटिंग मैकेनिज्म’ के लिए दोनों देशों के बीच 2025 में हस्ताक्षरित सहयोग ज्ञापन (Memorandum of Cooperation) के बाद आए हैं।

मुख्य बिंदु

यह तंत्र उन शमन परियोजनाओं (mitigation projects) पर सहयोग के लिए एक ढांचा प्रदान करता है जो भारत में सतत विकास का समर्थन करते हुए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम या समाप्त करती हैं। यह पेरिस समझौते के तहत भारत और जापान दोनों के ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDCs) को प्राप्त करने में भी योगदान देगा। कार्यान्वयन नियम इस तंत्र के लिए शासन व्यवस्था निर्धारित करते हैं, जिसमें दोनों सरकारों के प्रतिनिधियों वाली एक संयुक्त समिति का गठन, पारदर्शी परियोजना अनुमोदन प्रक्रियाएं, तीसरे पक्ष द्वारा सत्यापन और पुष्टि की प्रक्रियाएं, सतत विकास संबंधी सुरक्षा उपाय और कार्बन क्रेडिट के जारी होने व हस्तांतरण को ट्रैक करने के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्रियां शामिल हैं।

‘जॉइंट क्रेडिटिंग मैकेनिज्म’ (JCM) जापान सरकार द्वारा शुरू की गई एक द्विपक्षीय पहल है, जिसका उद्देश्य भागीदार देशों के सहयोग से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती को सुविधाजनक बनाना है।

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