संभावित ‘बेबेसिया’ संक्रमण के खतरे के बीच गिर के शेरों को किया जा रहा आइसोलेट

गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने जानकारी दी है कि गिर सोमनाथ और अमरेली जिलों में ‘बेबेसिया’ संक्रमण के संदिग्ध मामलों के कारण शेर के शावकों की मृत्यु हुई है। इसे देखते हुए, प्रभावित क्षेत्रों के 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले शेरों को संक्रमण फैलने से रोकने के लिए आइसोलेट (अलग) किया जा रहा है।

संक्रमण का कारण और खतरा:

  • गर्मी का प्रभाव: गर्मियों में बढ़ते तापमान और सूखे के कारण जंगली जानवरों में शारीरिक तनाव (physiological stress) बढ़ जाता है, जिससे वे ‘टिक’ (पिस्सू/किलनी) के संक्रमण और अन्य बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
  • वेक्टर (रोग वाहक): ‘टिक’ (Ixodes ticks) बेबेसिया जैसी बीमारियों को फैलाने का मुख्य माध्यम हैं। वन विभाग इसी कारण कड़ी निगरानी रख रहा है।

बेबेसिया (Babesia) क्या है?

अमेरिकी सीडीसी (US-CDC) के अनुसार:

  • परजीवी: बेबेसिया एकल-कोशिका वाले प्रोटोजोआ परजीवी हैं, जो रक्त की लाल कोशिकाओं (Red blood cells) को संक्रमित करते हैं।
  • फैलाव: यह मुख्य रूप से संक्रमित ‘टिक’ के काटने से फैलता है।
  • लक्षण: इससे होने वाली बीमारी ‘बेबेसिओसिस’ (Babesiosis) के लक्षण मलेरिया जैसे होते हैं, जिनमें बुखार, थकान और हीमोलिटिक एनीमिया (रक्त की कमी) प्रमुख हैं।
  • प्रजातियाँ: वैज्ञानिकों ने अब तक बेबेसिया की 100 से अधिक प्रजातियाँ दर्ज की हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम ही मनुष्यों में संक्रमण का कारण बनती हैं।
error: Content is protected !!