साइप्रस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा
साइप्रस के राष्ट्रपति, श्री निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स (Nikos Christodoulides) ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 20 से 23 मई 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा की। यह यात्रा भारत और साइप्रस के बीच बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों के एक महत्वपूर्ण चरण का प्रतीक है।
यात्रा के मुख्य बिंदु और रणनीतिक महत्व:
- ऐतिहासिक संदर्भ: यह यात्रा जून 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की साइप्रस यात्रा के बाद हुई है, जिसने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की नींव रखी थी। वर्तमान यात्रा संबंधों को ‘परिणाम-उन्मुख’ और ‘कार्यान्वयन-संचालित’ चरण में ले जाने पर केंद्रित है।
- EU प्रेसीडेंसी: यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब साइप्रस यूरोपीय संघ (EU) की परिषद की अध्यक्षता कर रहा है, जो इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
- संयुक्त कार्य योजना: दोनों नेताओं ने ‘भारत-साइप्रस संयुक्त कार्य योजना 2025-2029’ के कार्यान्वयन में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
- राजनयिक संबंध: दोनों देशों ने 2027 में अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 65वीं वर्षगांठ को विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से मनाने पर सहमति व्यक्त की है।
सुरक्षा और वैश्विक सहयोग:
- शांति स्थापना: राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स ने साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (UNFICYP) के लिए भारत के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की और इसके जनादेश के प्रति पूर्ण समर्थन दोहराया।
- आतंकवाद के खिलाफ प्रतिबद्धता: दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ द्वारा नामित सभी आतंकवादी संगठनों, उनके प्रॉक्सी समूहों, वित्तपोषकों और समर्थकों के खिलाफ मजबूत और ठोस कार्रवाई का आह्वान किया।
- UNSC 1267 समिति: चर्चा के दौरान ISIL (दाएश) और अल-कायदा प्रतिबंध समिति (जिसे औपचारिक रूप से 1267 UNSC प्रतिबंध समिति के रूप में जाना जाता है) के माध्यम से लक्षित प्रतिबंधों के महत्व पर जोर दिया गया।
पृष्ठभूमि: साइप्रस
साइप्रस पूर्वी भूमध्य सागर में स्थित एक द्वीप है, जो प्राचीन काल से ही अपने खनिज संसाधनों, उत्कृष्ट मदिरा (wines), कृषि उत्पादों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है।


