केंद्रीय मंत्रिमंडल ने “कपास उत्पादकता मिशन” को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई, 2026 को कपास क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए “कपास उत्पादकता मिशन” (Mission for Cotton Productivity) को मंजूरी दी।
₹5,659.22 करोड़ के परिव्यय वाला यह मिशन 2026-27 से 2030-31 तक चलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के “सफेद सोने/व्हाइट गोल्ड” (कपास) की उत्पादकता को बढ़ाना और वैश्विक स्तर पर इसे प्रतिस्पर्धी बनाना है।
मिशन के मुख्य लक्ष्य और रणनीतियाँ
यह मिशन सरकार के “5F” विजन (Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign) पर आधारित है:
- उत्पादकता में वृद्धि: कपास की लिंट उत्पादकता को 440 किग्रा/हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किग्रा/हेक्टेयर करने का लक्ष्य है।
- उत्पादन लक्ष्य: 2030-31 तक कपास उत्पादन को 498 लाख गांठों तक पहुँचाना।
- आधुनिक तकनीक: उच्च घनत्व रोपण प्रणाली (HDPS), कम दूरी पर बुवाई और एकीकृत कपास प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाएगा।
- बीज विकास: जलवायु-अनुकूल और कीट-प्रतिरोधी (विशेषकर गुलाबी सुंडी/Pink Bollworm से लड़ने वाली) किस्मों का विकास।
- ELS कपास: उद्योग की मांग को पूरा करने के लिए ‘एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल’ (ELS) कपास के उत्पादन पर विशेष जोर।
- संयुक्त कार्यान्वयन: यह मिशन केंद्रीय कृषि और केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से ICAR और CSIR जैसे संस्थानों के सहयोग से कार्यान्वित किया जाएगा।
- लाभार्थी: इस मिशन से 14 राज्यों के 140 जिलों के लगभग 32 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
गुणवत्ता और ब्रांडिंग
- कस्तूरी कॉटन भारत (Kasturi Cotton Bharat): भारतीय कपास की पहचान को वैश्विक स्तर पर एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए ट्रैसेबिलिटी (Traceability), प्रमाणन और ब्रांडिंग को बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा।
- आधुनिकीकरण: लगभग 2,000 जिनिंग और प्रोसेसिंग इकाइयों का आधुनिकीकरण किया जाएगा ताकि कपास की सफाई और रेशे की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
- वैकल्पिक फाइबर: केवल कपास ही नहीं, बल्कि सन (flax), बांस (bamboo), केला (banana) और मिल्कवीड जैसे वैकल्पिक प्राकृतिक रेशों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
भारतीय कपास क्षेत्र की वर्तमान स्थिति
| विवरण | सांख्यिकी |
| वैश्विक उत्पादन में हिस्सा | लगभग 20% |
| वैश्विक क्षेत्रफल में स्थान | प्रथम (114.47 लाख हेक्टेयर – दुनिया का 37%) |
| उत्पादन में स्थान | दूसरा (294.25 लाख गांठें) |
| उत्पादकता रैंक | 40वाँ (437 किग्रा/हेक्टेयर) |
| खेती का प्रकार | 67% वर्षा सिंचित, 33% सिंचित |
महत्वपूर्ण तथ्य
- किस्में: भारत एकमात्र ऐसा देश है जहाँ कपास की चारों किस्मों (G. Arboreum, G. Herbaceum, G. Barbadense, G. Hirsutum) उगाई जाती हैं। भारत में 90% हाइब्रिड उत्पादन G. Hirsutum प्रजाति का है।
- Bt कपास: यह भारत में व्यावसायिक खेती के लिए स्वीकृत एकमात्र जीएम (GM) फसल है। Bollgard (I और II) तकनीक का उपयोग मुख्य रूप से लेपिडोप्टेरान लार्वा (कीटों) के प्रतिरोध के लिए किया जाता है।
- MSP ऑपरेशंस: भारतीय कपास निगम (CCI) को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत कपास की खरीद के लिए नामित किया गया है।


