CBDT ने 2017 से पहले के निवेशों के लिए GAAR से छूट को स्पष्ट किया

CBDT ने आयकर नियमों में संशोधन कर यह स्पष्ट कर दिया है कि 1 अप्रैल 2017 से पहले किए गए निवेशों की बिक्री से होने वाली आय पर GAAR लागू नहीं होगा। इसका मतलब है कि पुरानी संपत्तियों की बिक्री पर ‘ग्रैंडफादरिंग’ (Grandfathering) लाभ सुरक्षित रहेंगे, भले ही बिक्री आज की तारीख में की गई हो।

GAAR क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी?

GAAR का अर्थ है ‘सामान्य कर अपवंचन रोधी नियम’। यह उन व्यावसायिक व्यवस्थाओं को लक्षित करता है जिनका एकमात्र उद्देश्य टैक्स चोरी करना होता है और जिनमें कोई वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्य (Commercial Substance) नहीं होता।इसे पहली बार 2012-13 के बजट में प्रस्तावित किया गया था, लेकिन विवादों के कारण यह 1 अप्रैल 2017 से प्रभावी हुआ।

‘ग्रैंडफादरिंग’ (Grandfathering) का अर्थ

ग्रैंडफादरिंग एक कानूनी प्रावधान है जो पुरानी व्यवस्था के तहत किए गए कार्यों को नए नियमों के प्रभाव से बचाता है। यदि आपने 1 अप्रैल 2017 से पहले निवेश किया है, तो कानून यह मानता है कि आपने उस समय के प्रचलित नियमों के आधार पर निर्णय लिया था। इसलिए, भले ही 2017 के बाद नियम बदल गए हों, आपके पुराने निवेश पुराने नियमों के अनुसार ही चलते रहेंगे।

टाइगर ग्लोबल और फ्लिपकार्ट विवाद का संदर्भ

सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में फैसला सुनाया था कि टाइगर ग्लोबल द्वारा मॉरीशस के माध्यम से फ्लिपकार्ट की हिस्सेदारी वॉलमार्ट को बेचना भारत में कर योग्य था।

  • टाइगर ग्लोबल का तर्क था कि चूंकि निवेश 2017 से पहले का है, इसलिए इसे ग्रैंडफादरिंग लाभ मिलना चाहिए।
  • टैक्स अधिकारियों का तर्क था कि यह ढांचा केवल टैक्स बचाने के लिए बनाया गया था।
  • इस अदालती फैसले ने निवेशकों में डर पैदा कर दिया था कि क्या उनके पुराने निवेश भी अब GAAR के रडार पर आ जाएंगे।

निष्कर्ष और प्रभाव

CBDT के इस संशोधन ने ‘कानूनी निश्चितता’ (Tax Certainty) प्रदान की है। इससे विदेशी निवेशकों को यह भरोसा मिलेगा कि भारत में कर नियम अचानक या पूर्वव्यापी (Retrospective) तरीके से उन पर थोपे नहीं जाएंगे। इससे भविष्य में कर अधिकारियों और निवेशकों के बीच होने वाले कानूनी विवादों में कमी आएगी। अब यह पूरी तरह साफ है कि कट-ऑफ तारीख (1 अप्रैल 2017) से पहले का कोई भी निवेश सुरक्षित है।

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