केंद्रीय गृह मंत्री ने श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के ज्योति-जोत दिवस के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के ज्योति-जोत दिवस के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के बारे में

जन्म और उत्तराधिकार: 1595 में वर्तमान पंजाब में जन्मे गुरु हरगोबिंद साहिब जी कम उम्र में गुरु अर्जुन देव जी के उत्तराधिकारी बने।

मीरी-पीरी की अवधारणा: उन्होंने ‘मीरी-पीरी’ की अवधारणा पेश की, जिसका प्रतीक दो तलवारें हैं जो लौकिक (सांसारिक) और आध्यात्मिक अधिकार का प्रतिनिधित्व करती हैं।

सिख धर्म का विकास: उनके नेतृत्व में, सिख धर्म में आध्यात्मिक मार्गदर्शन और अन्याय का विरोध करने की तत्परता, दोनों को शामिल किया गया।

संत-सिपाही की परंपरा: सिख धर्म के छठे गुरु, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने ‘संत-सिपाही’ की परंपरा स्थापित की, जिससे सिख धर्म मानवता की रक्षा के लिए एक शक्तिशाली माध्यम बना।

अकाल तख्त की स्थापना: उन्होंने 1609 में अमृतसर में अकाल तख्त की नींव रखी, जो आज भी सिख धर्म में सर्वोच्च सत्ता के केंद्रों में से एक है।

विरासत: उनकी विरासत में धार्मिक शिक्षाओं और संगठनात्मक सुधारों के माध्यम से सिख समुदाय को मजबूत करना शामिल है, जिसका विश्वास और अनुयायियों पर स्थायी प्रभाव पड़ा है।

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