केंद्रीय गृह मंत्री ने रानी अवंतीबाई लोधी को श्रद्धांजलि अर्पित की

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 20 मार्च को स्वतंत्रता सेनानी रानी अवंतीबाई लोधी के बलिदान दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें साहस, त्याग और देशभक्ति का प्रतीक बताया। रानी अवंतीबाई का जीवन राष्ट्र के प्रति वीरता और समर्पण का एक अद्वितीय उदाहरण है।

रानी अवंतीबाई लोधी: जीवन और संघर्ष का परिचय

  • जन्म: उनका जन्म 16 अगस्त, 1831 को वर्तमान मध्य प्रदेश के मनकेहणी गांव में हुआ था। बचपन से ही वे घुड़सवारी और तलवारबाजी में निपुण थीं।
  • प्रशासनिक नेतृत्व: अपने पति के खराब स्वास्थ्य के कारण उन्होंने रामगढ़ राज्य का प्रशासनिक नियंत्रण संभाला।
  • व्यपगत नीति (Doctrine of Lapse) का विरोध: जब अंग्रेजों ने ‘हड़प/व्यपगत नीति’ के तहत उनके राज्य को हथियाने की कोशिश की, तो रानी का प्रतिरोध तीव्र हो गया। उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों को बाहर निकाल दिया, शासन की कमान संभाली और किसानों को औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया।
  • 1857 का विद्रोह: भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने पड़ोसी शासकों का समर्थन जुटाया और 1857 में खेड़ी के युद्ध में अपनी सेना का नेतृत्व किया, जहाँ ब्रिटिश सेना को हार का सामना करना पड़ा।
  • बलिदान: मार्च 1858 में, जब ब्रिटिश सेना ने एक बड़ा जवाबी हमला किया, तो उन्होंने दुश्मनों के हाथों पकड़े जाने के बजाय युद्ध के मैदान में अपने प्राणों की आहुति देना (आत्म-बलिदान) चुना।
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