भारत सरकार ने आयकर नियम, 2026 अधिसूचित किए
भारत सरकार ने 20 मार्च को आयकर नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जो 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे। ये नए नियम प्रत्यक्ष कराधान (Direct Taxation) के तहत प्रक्रियात्मक और अनुपालन प्रणालियों में एक बड़े बदलाव का संकेत देते हैं। ये नियम आयकर अधिनियम, 2025 के प्रावधानों को लागू करते हैं और पुरानी प्रणालियों का स्थान लेते हैं।
मुख्य परिवर्तन और विशेषताएं:
- लाभांश (Dividend) वितरण पर कड़ा नियंत्रण: कंपनियों को अब शेयर रजिस्टर बनाए रखना होगा, आम बैठकें आयोजित करनी होंगी और लाभांश का भुगतान केवल भारत के भीतर ही करना होगा। इससे लाभांश वितरण पर घरेलू नियंत्रण मजबूत होगा।
- स्टॉक एक्सचेंज अनुपालन: पारदर्शिता बढ़ाने के लिए स्टॉक एक्सचेंजों को अब 7 वर्षों तक ‘ऑडिट ट्रेल’ (लेनदेन का रिकॉर्ड) सुरक्षित रखना होगा। उन्हें लेनदेन के रिकॉर्ड को हटाने से रोकना होगा और संशोधित लेनदेन पर मासिक रिपोर्ट देनी होगी।
- पूंजीगत लाभ (Capital Gains) और जीरो कूपन बॉन्ड: डिबेंचर कन्वर्जन और क्रॉस-बॉर्डर पुनर्गठन जैसे जटिल मामलों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश पेश किए गए हैं। साथ ही, जीरो कूपन बॉन्ड के लिए एक नया ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें जारी करने से 3 महीने पहले आवेदन और दो एजेंसियों से ‘इन्वेस्टमेंट-ग्रेड रेटिंग’ अनिवार्य होगी।
- सीमा पार कराधान (Cross-border Taxation): कर अधिकारियों को अनिवासी आय (Non-resident income) के निर्धारण के लिए अतिरिक्त शक्तियां दी गई हैं। वे अब प्रतिशत आधार, वैश्विक लाभ अनुपात या किसी अन्य उचित तरीके से आय का अनुमान लगा सकते हैं।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था: डिजिटल और रिमोट व्यवसायों के लिए ‘महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति’ (Significant Economic Presence) की सीमा ₹2 करोड़ के लेनदेन या 3 लाख उपयोगकर्ता निर्धारित की गई है।
- HRA नियमों में विस्तार: हाउस रेंट अलाउंस (HRA) छूट के लिए ‘उच्च श्रेणी’ के शहरों का दायरा बढ़ाया गया है। अब हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु जैसे शहर भी उच्च HRA कर छूट के पात्र होंगे।
- नए फॉर्म: पुराने ‘फॉर्म 26AS’ और ‘फॉर्म 16’ के स्थान पर अब फॉर्म 168 और फॉर्म 130 जैसे नए फॉर्म उपयोग किए जाएंगे।


