मोल्टेन साल्ट रिएक्टर (MSR) क्या है?

भारत में थोरियम के इस्तेमाल के लिए मोल्टेन सॉल्ट रिएक्टर (MSR) को उपयुक्त तकनीकों में से एक माना जा रहा है। थोरियम-आधारित ईंधन का इस्तेमाल करने वाला मोल्टेन सॉल्ट ब्रीडर रिएक्टर (MSBR), जिसके परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण में में इस्तेमाल होने की उम्मीद है, लगभग वायुमंडलीय दबाव पर संचालित होता है। है। इससे इसकी सेफ्टी बढ़ जाती है।हालाँकि, यह तकनीक अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुई है और इस तकनीक को लागू करने के आर्थिक निहितार्थों की जांच तब की जा सकती है, जब इसे सीमित स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा। यह जानकारी सरकार ने 11 मार्च 2026 को लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी थी।

मोल्टेन साल्ट रिएक्टर (MSR) क्या है?

IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) के अनुसार, MSR वे परमाणु विखंडन (Nuclear Fission) रिएक्टर हैं जिनमें:

  1. ईंधन या शीतलक (Coolant): पिघला हुआ नमक (Molten Salt) होता है।
  2. ऊष्मीय ऊर्जा: यह नमक उच्च तापमान पर तरल हो जाता है और वायुमंडलीय दबाव पर भारी मात्रा में तापीय ऊर्जा संचित कर सकता है।
  3. विखंडनीय सामग्री (Fissile Material): जब इसे ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है, तो विखंडनीय सामग्री को इसी पिघले हुए नमक में घोल दिया जाता है।

MSR के प्रमुख लाभ

  • औद्योगिक कार्बन मुक्ति (Decarbonization): औद्योगिक प्रक्रियाओं में कार्बन उत्सर्जन कम करने में सहायक।
  • कुशल और किफायती: बड़े पैमाने पर लागत प्रभावी बिजली प्रदान करने की क्षमता।
  • न्यूनतम परमाणु अपशिष्ट: उच्च-स्तरीय परमाणु कचरे (High-Level Nuclear Waste) का पदचिह्न बहुत कम होता है।
  • निष्क्रिय सुरक्षा (Passive Safety): इसमें ऐसी सुरक्षा विशेषताएं होती हैं जो मानवीय हस्तक्षेप के बिना भी दुर्घटनाओं को रोकने में सक्षम हैं।
  • सतत ईंधन चक्र: यह ईंधन चक्र के टिकाऊ विकल्प प्रदान करता है।

Source: PIB & IAEA

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