एक ही लॉन्चर से दो ‘प्रलय’ मिसाइलों का सफल परीक्षण

भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने साल 2025 के आखिरी दिन देश की सुरक्षा तैयारियों को एक नई ऊंचाई प्रदान की। 31 दिसंबर को ओडिशा के तट पर एक ऐतिहासिक परीक्षण के दौरान, DRDO ने एक ही मोबाइल लॉन्चर से दो ‘प्रलय’ (Pralay) मिसाइलों का एक साथ सफल लॉन्च किया।

छह महीनों में दूसरा बड़ा परीक्षण

यह परीक्षण भारतीय मिसाइल कार्यक्रम की परिपक्वता को दर्शाता है। इससे पहले, 28 और 29 जुलाई 2025 को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से इस मिसाइल के दो लगातार सफल परीक्षण किए गए थे। महज छह महीनों के भीतर यह दूसरा बड़ा शक्ति प्रदर्शन है, जो प्रलय मिसाइल प्रणाली को सेना में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

क्या है ‘प्रलय’ मिसाइल की खासियत?

‘प्रलय’ भारत की पहली स्वदेशी क्वासी-बैलिस्टिक (Quasi-Ballistic) मिसाइल है, जो युद्ध के मैदान में दुश्मन के लिए अभेद्य चुनौती पेश करती है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • सॉलिड प्रोपेलेंट: यह ठोस ईंधन आधारित मिसाइल है, जिससे इसे कम समय में लॉन्च किया जा सकता है।
  • सटीकता: अत्याधुनिक मार्गदर्शन (Guidance) और नेविगेशन सिस्टम के कारण यह उच्च स्तर की सटीकता सुनिश्चित करती है।
  • वॉरहेड क्षमता: यह विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए अलग-अलग तरह के वॉरहेड ले जाने में सक्षम है।
  • क्वासी-बैलिस्टिक प्रकृति: यह मिसाइल हवा में ही अपना रास्ता बदलने की क्षमता रखती है, जिससे दुश्मन के इंटरसेप्टर मिसाइल सिस्टम के लिए इसे पकड़ना नामुमकिन हो जाता है।

स्वदेशी तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण

इस मिसाइल का विकास हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) द्वारा किया गया है। इसमें DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। ‘प्रलय’ को विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर तैनात करने के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि 150 से 500 किलोमीटर की दूरी तक के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाया जा सके।

सामरिक महत्व

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही लॉन्चर से दो मिसाइलों का लॉन्च होना ‘सैचुरेशन स्ट्राइक’ (Saturation Strike) की क्षमता को दर्शाता है। इसका मतलब है कि भारत अब एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला कर दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त कर सकता है।

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