CAR-T सेल थेरेपी

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने हैदराबाद (तेलंगाना) की ‘हेलिक्स सेल थेराप्यूटिक्स प्राइवेट लिमिटेड’ के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस परियोजना का शीर्षक “मल्टीपल मायलोमा के इलाज के लिए नोवल ड्यूल-टारगेटिंग काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर (CAR) टी सेल्स का निर्माण और चरण-I क्लिनिकल ट्रायल का संचालन” है।

यह परियोजना मल्टीपल मायलोमा (Multiple Myeloma) के लिए एक उन्नत ‘ड्यूल-टारगेटिंग’ CAR-T सेल थेरेपी विकसित करने पर केंद्रित है। मल्टीपल मायलोमा एक बेहद कमजोर कर देने वाला और वर्तमान में लाइलाज माना जाने वाला ब्लड कैंसर (रक्त कैंसर) है।

क्या है यह नई तकनीक (नवाचार)?

  • वर्तमान थेरेपी की सीमा: वर्तमान में मौजूद CAR-T थेरेपी केवल BCMA (बी-सेल मैच्योरेशन एंटीजन) को लक्षित (target) करती हैं। हालांकि इसके परिणाम दोबारा बीमारी से पीड़ित होने वाले मरीजों में उत्साहजनक रहे हैं, लेकिन यह पूरी तरह स्थायी नहीं होते।
  • नया ड्यूल-टारगेटिंग दृष्टिकोण: इस नई खोज के तहत मल्टीपल मायलोमा कोशिकाओं पर मौजूद दो मार्करों—BCMA और CD19—को एक साथ निशाना बनाया जाएगा। इस दोहरे हमले से इलाज की प्रभावशीलता बढ़ेगी और कैंसर के दोबारा लौटने की संभावना काफी कम हो जाएगी (remission की अवधि लंबी होगी)। 

CAR-T सेल थेरेपी क्या है?

सरल शब्दों में कार्यप्रणाली: CAR-T सेल थेरेपी में मरीज के अपने ही शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाओं (T-लिम्फोसाइट्स या T-सेल्स) को प्रयोगशाला में जेनेटिक इंजीनियरिंग के जरिए इस तरह बदला जाता है कि वे कैंसर कोशिकाओं को विशेष रूप से पहचान सकें और उन्हें नष्ट कर सकें।

यह प्रस्तावित ड्यूल-टारगेटिंग (दोहरा लक्ष्य) रणनीति पारंपरिक सिंगल-मार्कर CAR-T थेरेपी की तुलना में एक बहुत बड़ी प्रगति है। इससे उन गंभीर मरीजों में लंबे समय तक ठीक रहने (long-term remission) के परिणाम मिलने की उम्मीद है, जिनका मल्टीपल मायलोमा का इलाज बेहद कठिन होता है।

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