सुप्रीम कोर्ट ने एपनिया टेस्ट पर AIIMS से विशेषज्ञ रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट को एक डॉक्टर की उस याचिका में पहली नजर में “सच्चाई की झलक” दिखी है, जिसमें कहा गया है कि केरल में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला एप्निया टेस्ट (Apnoea Test), ब्रेन डेथ (मस्तिष्क की मृत्यु) का निर्णायक आकलन नहीं है।
डॉ. सदानंदन गणपति द्वारा दायर याचिका पर कार्रवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने एम्स (AIIMS) को निर्देश दिया है कि वह तीन न्यूरोलॉजी या न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञों का एक पैनल बनाए। यह पैनल इस बात की जांच करेगा कि क्या सेरेब्रल एंजियोग्राम (Cerebral Angiogram) और ईईजी (EEG) जैसे तरीके ब्रेन डेथ का निर्धारण करने के लिए वर्तमान एप्निया टेस्ट से बेहतर हैं।
एप्निया टेस्ट (Apnoea Test): यह ब्रेन डेथ का पता लगाने के लिए एक अनिवार्य जांच है। इसमें देखा जाता है कि क्या मरीज का मस्तिष्क शरीर को सांस लेने का संकेत दे पा रहा है। यह ‘ब्रेनस्टेम’ (मस्तिष्क का हिस्सा) के काम न करने का एक पक्का संकेत माना जाता है।सेरेब्रल एंजियोग्राम: इसमें मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं की जांच की जाती है।ईईजी (EEG): यह मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि (Electric Activity) को मापता है।


