केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के लिए ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी कीं

देश से एनीमिया (खून की कमी) को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने 29 जून, 2026 को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) की 16वीं बैठक के दौरान ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के नए परिचालन दिशानिर्देश (Operational Guidelines) जारी किए।

इस लॉन्च के साथ ही इस कार्यक्रम का नाम आधिकारिक तौर पर ‘एनीमिया मुक्त भारत’ से बदलकर ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ कर दिया गया है। यह बदलाव केवल नाम में नहीं, बल्कि इसके दृष्टिकोण में आया है, जो अब केवल सप्लीमेंट्स (दवाइयाँ) देने से आगे बढ़कर टेस्टिंग, चिकित्सीय प्रबंधन, सही खान-पान और ‘जन चेतना’ के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी पर केंद्रित हो गया है।

रोग-निरोधक देखभाल से उपचारात्मक देखभाल  पर जोर

नई रणनीतियों के तहत, अब ध्यान केवल एनीमिया से बचाव (Prophylactic Care) पर नहीं, बल्कि उसके इलाज यानी उपचारात्मक देखभाल (Therapeutic Care) पर होगा। इसके लिए सघन जांच, उपचार, ट्रैकिंग  और केस-आधारित प्रबंधन को अपनाया जाएगा।

इस अभियान की एक सबसे बड़ी विशेषता T3 (टेस्ट, ट्रीट, टॉक) दृष्टिकोण से T4 (टेस्ट, ट्रीट, टॉक, ट्रैक) दृष्टिकोण की ओर बढ़ना है। इसके तहत अब लाभार्थियों की सघन जांच होगी, प्रोटोकॉल के अनुसार आयरन की कमी का इलाज किया जाएगा, सही खान-पान की काउंसलिंग दी जाएगी और गंभीर मरीजों के फॉलो-अप व रेफरल के लिए उनकी लगातार ट्रैकिंग की जाएगी।

पुराना ‘6x6x6’ अब बना ‘7x7x7’ फ्रेमवर्क

नए दिशानिर्देशों के तहत पुरानी रणनीति का दायरा बढ़ाते हुए इसे 7x7x7 फ्रेमवर्क में बदल दिया गया है, जिसमें एक नया लाभार्थी समूह, एक नया उपाय और एक नया संस्थागत तंत्र जोड़ा गया है:

  • 7वाँ लाभार्थी समूह: जन्म के समय कम वजन वाले शिशु (0 से 6 महीने)। एनीमिया के एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी में जाने के चक्र को तोड़ने के लिए शुरुआत से ही इस ग्रुप को शामिल किया गया है।
  • 7वाँ उपाय: “ईटिंग राइट” (सही खान-पान) दृष्टिकोण। इसके तहत दैनिक आदत के रूप में आयरन से समृद्ध और विविध प्रकार के पौष्टिक आहार के सेवन को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • 7वाँ संस्थागत तंत्र: डिजिटल ट्रैकिंग के लिए एक मजबूत निगरानी और मूल्यांकन ढांचा

गंभीर मामलों के लिए विशेष क्लिनिकल व्यवस्था और डिजिटल एकीकरण

  • इंट्रावेनस आयरन थेरेपी: गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में एनीमिया के गंभीर मामलों या जिन पर सामान्य दवाओं का असर नहीं हो रहा है, उनके इलाज के लिए इंट्रावेनस आयरन थेरेपी (FCM और आयरन सुक्रोज) को क्लिनिकल उपाय के रूप में शामिल किया गया है।
  • एकीकृत डिजिटल पोर्टल: देश भर के डेटा को एक जगह लाने के लिए सभी पोर्टल्स को आपस में जोड़ा जाएगा। गर्भवती महिलाओं के हीमोग्लोबिन टेस्ट का रिकॉर्ड ‘जननी पोर्टल’ से, बच्चों का रिकॉर्ड RBSK और U-WIN पोर्टल से लिया जाएगा। ये सभी डेटा अंततः एक एकीकृत ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान पोर्टल’ पर एकत्रित होंगे, जिससे देश स्तर पर सटीक विश्लेषण और योजना बनाई जा सकेगी।

‘जन भागीदारी’ से एनीमिया को ‘डी-नॉर्मलाइज’ करने का संकल्प:

इस लॉन्च के साथ ही देश भर में ‘जन भागीदारी’ नामक एक राष्ट्रव्यापी सामुदायिक लामबंदी अभियान की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य एनीमिया के प्रति लोगों की निष्क्रिय को खत्म करना और इसे परिवारों व समुदायों के सक्रिय भागीदारी के जरिए पूरी तरह से एक गंभीर समस्या के रूप में लेना है, ताकि हर नागरिक इसके खिलाफ जागरूक हो सके।

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