UNESCO और सिक्किम सरकार ने ‘रु-सोम’ पुलों की इंजीनियरिंग के संरक्षण के लिए साझेदारी की
यूनेस्को ने एयरबीएनबी (Airbnb) के सहयोग से भारत के सिक्किम में स्थित कंचनजंगा बायोस्फीयर रिजर्व में बेंत के पुलों, जिन्हें ‘रु-सोम’ के नाम से जाना जाता है, की स्वदेशी इंजीनियरिंग विरासत का दस्तावेजीकरण करने के लिए सिक्किम सरकार के साथ साझेदारी की है।
परियोजना के मुख्य उद्देश्य
- वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण: यह परियोजना फील्ड रिसर्च, सामुदायिक परामर्श और तकनीकी मूल्यांकन के माध्यम से रु-सोम पुलों के पर्यावरणीय और इंजीनियरिंग सिद्धांतों का व्यवस्थित रूप से विश्लेषण करेगी।
- पारंपरिक ज्ञान का उपयोग: इस पहल का उद्देश्य यह पता लगाना है कि ये समय की कसौटी पर खरी उतरी प्रथाएं जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के आधुनिक दृष्टिकोणों को कैसे समृद्ध कर सकती हैं।
- वैश्विक मान्यता: यह इंजीनियरिंग दृष्टिकोण को वैश्विक वैज्ञानिक और पर्यावरणीय चर्चाओं में लाएगा, जिससे समकालीन अंतःविषय ज्ञान सहयोग (transdisciplinary knowledge cooperation) में इसके एकीकरण को समर्थन मिलेगा।
लेप्चा समुदाय और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता
- निर्माण सामग्री: इन पुलों का निर्माण लेप्चा समुदाय द्वारा बांस, बेंत और लकड़ी जैसी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों से किया जाता है।
- पारिस्थितिक संतुलन: यह इंजीनियरिंग अभ्यास पारिस्थितिक संतुलन और संरचनात्मक लचीलेपन (structural resilience) की परिष्कृत समझ को दर्शाता है।
- सांस्कृतिक जुड़ाव: लेप्चा समुदाय का प्रकृति के साथ गहरा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध है। उनके पुल बनाने के तरीके विविध वातावरण और संरचनात्मक यांत्रिकी (structural mechanics) की उनकी गहरी समझ को दर्शाते हैं।
लचीलापन और प्रासंगिकता (अक्टूबर 2023 की घटना)
इन संरचनाओं की मजबूती का प्रमाण अक्टूबर 2023 में आई ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के दौरान मिला। जब आधुनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचा, तब भी कई बेंत के पुल (रु-सोम) इस आपदा के प्रभाव को झेल गए और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रदान करते रहे।
कंचनजंगा बायोस्फीयर रिजर्व और MAB कार्यक्रम
- विश्व नेटवर्क का हिस्सा: कंचनजंगा बायोस्फीयर रिजर्व 2018 में ‘बायोस्फीयर रिजर्व के विश्व नेटवर्क’ का हिस्सा बना।
सहयोगात्मक समाधान: यह मैन एंड द बायोस्फीयर (MAB) कार्यक्रम के मैंडेट का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह वैज्ञानिक और स्थानीय समुदायों को एक साथ लाने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है ताकि जलवायु अनुकूलन और शमन के लिए मिलकर समाधान विकसित किए जा सकें।


