UN ने पाकिस्तान से तक्षशिला साइट्स पर किए गए ‘पुनर्निर्माण’ के कार्य को रोकने को कहा
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने पाकिस्तान से तक्षशिला (Taxila)—जो कि एक यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल है—के दो ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान पहुँचाने वाले पुनर्निर्माण कार्यों को वापस पुरानी स्थिति में लाने को कहा है, अन्यथा इन्हें एजेंसी की “खतरे की सूची” (danger list) में डाल दिया जाएगा।
यूनेस्को ने कहा कि हाल ही में किए गए अनावश्यक हस्तक्षेपों के कारण, वह मोहरा मोरादू (Mohra Moradu) और सिरकप (Sirkap) के ऐतिहासिक स्थलों को अपनी सूची से हटाने में संकोच नहीं करेगा, ठीक उसी तरह जैसे उसने जर्मनी के एक विश्व धरोहर स्थल को हटा दिया था।
तक्षशिला के बारे में
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रावलपिंडी जिले में स्थित तक्षशिला एक विशाल चरणबद्ध स्थल (serial site) है, जिसमें मध्यपाषाण काल (Mesolithic) की एक गुफा और चार शुरुआती बस्तियों के पुरातात्विक अवशेष तथा बौद्ध मठ शामिल हैं। चीन को पश्चिम से जोड़ने वाले सिल्क रोड की एक शाखा पर रणनीतिक रूप से स्थित, तक्षशिला पहली और पांचवीं शताब्दी के बीच अपने चरम पर पहुँचा था।
तक्षशिला में चार बस्तियों के अवशेष पांच शताब्दियों से अधिक के समय में भारतीय उपमहाद्वीप पर शहरी विकास के पैटर्न को दर्शाते हैं। इनमें से एक स्थल, ‘भीर टीला’ (Bhir mound), तक्षशिला में सिकंदर के विजयी प्रवेश की ऐतिहासिक घटना से जुड़ा हुआ है।
सरायकेला (Saraikala), भीर (Bhir), सिरकप (Sirkap), और सिरसुख (Sirsukh) के पुरातात्विक स्थल सामूहिक रूप से भारतीय उपमहाद्वीप पर शहरी बस्तियों के विकास को प्रदर्शित करने में अद्वितीय महत्व रखते हैं। सरायकेला का प्रागैतिहासिक टीला तक्षशिला की सबसे पुरानी बस्ती का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ नवपाषाण (Neolithic), कांस्य युग (Bronze Age) और लौह युग (Iron Age) के निवास के साक्ष्य मिलते हैं।
भीर टीला तक्षशिला का सबसे पहला ऐतिहासिक शहर है, और इसकी स्थापना संभवतः छठी शताब्दी ईसा पूर्व में हखामनी (Achaemenians) साम्राज्य द्वारा की गई थी। इसकी पत्थर की दीवारें, घरों की नींव और घुमावदार सड़कें उपमहाद्वीप पर शहरीकरण के शुरुआती रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं। भीर का संबंध 326 ईसा पूर्व में सिकंदर महान के तक्षशिला में विजयी प्रवेश से भी है।
सिरकप एक किलेबंद (घेराबंदी वाला) शहर था, जिसकी स्थापना दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के मध्य में हुई थी।
तक्षशिला के इस चरणबद्ध स्थल में खानपुर गुफा भी शामिल है, जहाँ से मध्यपाषाण काल के परतदार सूक्ष्म-पाषाण उपकरण (stratified microlithic tools) प्राप्त हुए हैं, साथ ही विभिन्न अवधियों के कई बौद्ध मठ और स्तूप भी यहाँ मौजूद हैं।
तक्षशिला के बौद्ध पुरातात्विक स्थलों में धर्मराजिका परिसर और स्तूप, खदेड मोहरा समूह, कालवान समूह, गिरि मठ, कुणाल स्तूप और मठ, जंडियाल परिसर, लालचक और बादलपुर स्तूप के अवशेष व मठ, मोहरा मोरादू मठ के अवशेष, पिपलियान और जौलियान के अवशेष, और बहलार स्तूप व उसके अवशेष शामिल हैं।
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