टार बॉल प्रबंधन नियम, 2026 का मसौदा
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पहली बार समुद्री प्रदूषण से निपटने के लिए टार बॉल प्रबंधन नियम, 2026 का प्रस्ताव रखा है। टार बॉल कच्चे तेल के रिसाव, दुर्घटनाओं और अपशिष्ट से बनने वाला चिपचिपा अवशेष होता है, जो तटीय और समुद्री पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनता है।
क्या हैं टार बॉल: ये काले, चिपचिपे और अर्ध-ठोस पदार्थ होते हैं, जो समुद्र में तेल के फैलाव के बाद बनते हैं और लहरों के साथ तटों पर जमा हो जाते हैं।
सबसे अधिक प्रभाव: भारत के पश्चिमी तट पर मानसून के दौरान तेज हवाओं और समुद्री धाराओं के कारण टार बॉल तट पर अधिक मात्रा में पहुंचते हैं।
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर असर: टार बॉल में भारी धातुएं, सूक्ष्म तत्व और दीर्घकालिक जैविक प्रदूषक होते हैं, जो वनस्पति, जीव-जंतुओं और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
साथ ही, पर्यटन उद्योग पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- नियमों की प्रमुख व्यवस्था
- टार बॉल के उत्पादन, संग्रह, भंडारण, परिवहन, उपचार और निपटान की जिम्मेदारी तय की गई है।
- इसमें पेट्रोलियम, बंदरगाह, रक्षा आदि मंत्रालयों के साथ-साथ राज्य और जिला स्तर की एजेंसियों की भूमिकाएं निर्धारित की गई हैं।
- एक समन्वय समिति बनाई जाएगी, जिसमें सात मंत्रालयों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य शामिल होंगे।
राज्यों के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान: तटीय क्षेत्रों में टार बॉल प्रदूषण को राज्य आपदा घोषित करने का प्रस्ताव है, जिससे इसका प्रबंधन आपदा प्रबंधन कानून के तहत किया जाएगा।निपटान और पुनः उपयोग: जिन टार बॉल की ऊष्मा क्षमता 1,500 किलो-कैलोरी से अधिक होगी, उन्हें सीमेंट उद्योग में ईंधन के रूप में उपयोग किया जा सकेगा।


