स्टेम सेल्स ने गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी को 15 साल तक दूर रखा – एक नई स्टडी
सैन राफेल अस्पताल (San Raffaele Hospital), मिलान के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन के अनुसार, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (स्टेम सेल प्रत्यारोपण) ने न्यूरोमायलाइटिस ऑप्टिका (NMO) — जो कि एक दुर्लभ और आक्रामक ऑटोइम्यून बीमारी है — से पीड़ित दो मरीजों को बिना किसी निरंतर दवा के 15 वर्षों तक इस बीमारी के दोबारा उभरने (रिलेप्स) से बचाए रखा है। इस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट ने मरीजों के पूरे इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को किसी अन्य व्यक्ति के इम्यून सिस्टम से सफलतापूर्वक बदल दिया। यह शोध स्टडी नेचर जर्नल में प्रकाशित हुई है।
NMO बीमारी में, इम्यून सिस्टम गलती से रीढ़ की हड्डी (spinal cord) और ऑप्टिक नर्व (आँख की नस, जो आँख को मस्तिष्क से जोड़ती है) पर हमला कर देता है। यह बीमारी आँखों में दर्द, दृष्टि हानि (अंधापन), उल्टी और पैरालिसिस (लकवा) के दौरों को ट्रिगर कर सकती है, जो दिनों, हफ्तों या महीनों तक रह सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि ट्रांसप्लांट किए गए इम्यून सिस्टम में ‘रेगुलेटरी टी-सेल्स’ (regulatory T cells) का विस्तार देखा गया। यह एक प्रकार की इम्यून सेल होती है जो शरीर को अपने ही ऊतकों (tissues) पर हमला करने के बजाय खुद को स्वीकार करने (सहनशीलता बनाए रखने) में मदद करती है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि शरीर में इम्यून टॉलरेंस (इम्यून सहनशीलता) कैसे बहाल हुई। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज के मायने अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए भी हो सकते हैं, हालांकि इसके लिए अभी और आगे शोध करने की आवश्यकता है।
ऑटोइम्यून बीमारियां
ऑटोइम्यून बीमारियां तब होती हैं जब आपका इम्यून सिस्टम अत्यधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे यह आपके शरीर के अपने ही ऊतकों को नुकसान पहुँचाने और उन पर हमला करने लगता है। ऑटोइम्यून बीमारियां 80 से अधिक प्रकार की होती हैं। ये आपके शरीर के लगभग किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती हैं।
ऑटोइम्यून बीमारियों के कुछ उदाहरण हैं: रुमेटाइड आर्थराइटिस (गठिया), सिस्टेमिक ल्यूपस एरिथेमैटोसस (ल्यूपस), इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (आंतों की सूजन), मल्टीपल स्केलेरोसिस, टाइप 1 डायबिटीज (मधुमेह), गुइयां-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barre syndrome) आदि।
स्टेम सेल्स
स्टेम सेल्स (Stem cells) ऐसी कोशिकाएं होती हैं जिनमें शरीर में कई अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं के रूप में विकसित होने की क्षमता होती है। ये शरीर के लिए एक मरम्मत प्रणाली (repair system) के रूप में कार्य करती हैं।
स्टेम सेल्स मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं: एम्ब्रियोनिक स्टेम सेल्स (भ्रूणीय स्टेम सेल्स) और एडल्ट स्टेम सेल्स (वयस्क स्टेम सेल्स)। इसकी कुछ मुख्य श्रेणियां हैं: “प्लूरिपोटेंट” (pluripotent) स्टेम सेल्स (भ्रूणीय स्टेम सेल्स और इंड्यूस्ड प्लूरिपोटेंट स्टेम सेल्स) और नॉन-एम्ब्रियोनिक या सोमैटिक स्टेम सेल्स (जिन्हें आमतौर पर “एडल्ट” स्टेम सेल्स कहा जाता है)।
प्लूरिपोटेंट स्टेम सेल्स में वयस्क शरीर की सभी कोशिकाओं में बदलने की क्षमता होती है।
एडल्ट स्टेम सेल्स किसी ऊतक (टिश्यू) या अंग में पाई जाती हैं और ये उसी ऊतक या अंग की विशेष प्रकार की कोशिकाओं को बनाने के लिए विकसित हो सकती हैं।
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