संकटापन्न प्रजातियों की अधिसूचना जारी करने के लिए SOP
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 38 के तहत ‘संकटग्रस्त प्रजातियों की अधिसूचना’ (Notification of Threatened Species) के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। इस SOP का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा संकटग्रस्त प्रजातियों की पहचान, मूल्यांकन और अधिसूचना के लिए एक समान, पारदर्शी और वैज्ञानिक रूप से मजबूत प्रक्रिया को सुगम बनाना है।
जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 38:
- केंद्र सरकार की शक्ति: यह धारा केंद्र सरकार को संबंधित राज्य सरकार के परामर्श से किसी भी ऐसी प्रजाति को ‘संकटग्रस्त प्रजाति’ (Threatened Species) के रूप में अधिसूचित करने की शक्ति देती है, जो विलुप्त होने की कगार पर है या निकट भविष्य में जिसके विलुप्त होने की संभावना है।
- संग्रहण पर रोक और पुनर्वास: यह अधिसूचना संबंधित प्रजाति के संग्रहण (collection) को नियंत्रित या प्रतिबंधित करती है और उसके पुनर्वास तथा संरक्षण के लिए उचित उपाय प्रदान करती है।
- शक्तियों का हस्तांतरण: केंद्र सरकार इन शक्तियों को राज्य सरकारों को भी सौंप सकती है।
वर्तमान स्थिति: अब तक,केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 17 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित 159 पौधों की प्रजातियों और 173 वन्य जीव प्रजातियों को संकटग्रस्त प्रजातियों के रूप में अधिसूचित किया है।
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