एडिनबर्ग के रॉयल कॉलेज ऑफ़ सर्जन्स में महर्षि सुश्रुत की कांस्य प्रतिमा का अनावरण

सर्जरी (शल्यचिकित्सा) के जनक के रूप में ज्ञात महर्षि सुश्रुत की एक कांस्य प्रतिमा का स्कॉटलैंड के ‘रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग’ (Royal College of Surgeons of Edinburgh) में अनावरण किया गया है। यह प्रतिमा उनके उन प्राचीन चिकित्सा ग्रंथों का सम्मान करती है, जिनमें अग्रणी शल्य तकनीकों का दस्तावेजीकरण किया गया था।

यह प्रतिमा चिकित्सा ज्ञान के लंबे और विविध इतिहास को एक व्यापक पहचान देती है, जिसका एक बड़ा हिस्सा आधुनिक मेडिकल स्कूलों के अस्तित्व में आने से सदियों पहले यूरोप से बहुत दूर विकसित हुआ था। यह प्रतिमा रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग में स्थापित की गई है, जो एक ऐसा संस्थान है जो सोलहवीं शताब्दी की शुरुआत से अस्तित्व में है।

लगभग 600 ईसा पूर्व (BCE) ऐतिहासिक नगरी काशी में फलने-फूलने वाले सुश्रुत के समग्र चिकित्सा दृष्टिकोण में व्यापक क्षेत्र शामिल थे, जिनमें शामिल हैं:

  • शल्य चिकित्सा (Shalya Tantra)
  • शरीर रचना विज्ञान (Anatomy)
  • कॉस्मेटिक और रिकंस्ट्रक्टिव (प्लास्टिक) सर्जरी
  • प्रसूति एवं स्त्री रोग (Obstetrics & Gynaecology)
  • नेत्र विज्ञान (Ophthalmology)
  • ऑर्थोपेडिक्स (Orthopaedics)
  • ट्रॉमेटोलॉजी (Traumatology)
  • फार्माकोलॉजी (औषधि विज्ञान)

उनकी यह विरासत ‘सुश्रुत संहिता’ द्वारा पुष्ट होती है, जो एक प्राचीन विश्वकोश जैसा ग्रंथ है। इस ग्रंथ में 1,120 से अधिक बीमारियों, 120 शल्य चिकित्सा उपकरणों और 300 शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं (जिसमें मोतियाबिंद का ऑपरेशन, लिथोटॉमी यानी पथरी निकालना और ट्यूमर हटाना शामिल है) का विस्तृत विवरण दिया गया है।

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