कोन्याक जनजाति की पारंपरिक औधधि
एक प्रारंभिक जांच में, शोधकर्ताओं ने नागालैंड की कोन्याक जनजाति द्वारा उपयोग किए जाने वाले एक पारंपरिक औषधीय फॉर्मूलेशन (नुस्खे) की पहचान की है। इसमें कैंसर-रोधी (anti-cancer) क्षमता पाई गई है, जो स्वदेशी औषधीय परम्पराओं में मूल्यवान वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।
एक बहु-संस्थान अनुसंधान दल ने पाँच पौधों वाले एक पॉलीहर्बल फॉर्मूलेशन की जांच की और पाया कि इसके जैव-सक्रिय यौगिक (bioactive compounds) प्रभावी रूप से VEGFR2 को लक्षित कर सकते हैं। यह एक प्रमुख प्रोटीन है जो ट्यूमर में रक्त वाहिकाओं की वृद्धि के लिए जिम्मेदार होता है।
ये निष्कर्ष ‘माइक्रोकेमिकल जर्नल’ (Microchemical Journal) में प्रकाशित हुए थे। यह पहली बार है जब कोन्याक जनजातीय चिकित्सकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले एक विशिष्ट पाँच-पौधों के फॉर्मूलेशन का उन्नत गणनात्मक तरीकों (advanced computational methods) का उपयोग करके वैज्ञानिक रूप से विश्लेषण और सत्यापन किया गया है।
कोन्याक, पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड की प्रमुख जनजातियों में से एक है। उन्हें ‘नरमुंड शिकारी’ (Headhunters) कहा जाता है।


