धोखाधड़ी के लिए मुआवजे का RBI का नया सिस्टम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी (Digital Payment Fraud) के शिकार होने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए मुआवजे तंत्र (Compensation Mechanism) में बड़े बदलावों की घोषणा की है। 24 जून को जारी की गई इस नई अधिसूचना के तहत, ₹50,000 तक की धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ित अपने नुकसान का एक बड़ा हिस्सा वापस पा सकेंगे।
केंद्रीय बैंक द्वारा पूरी तरह से उपभोक्ता-हित में बनाया गया यह नया सुरक्षा ढांचा 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों की देनदारी को सीमित करना और उनके वित्तीय हितों की रक्षा करना है।
मुआवजे का गणित: किसे और कितना मिलेगा पैसा?
नई गाइडलाइंस के मुताबिक, इस मुआवजे का एक बड़ा हिस्सा खुद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) वहन करेगा।
- अधिकतम सीमा: एक वास्तविक पीड़ित, जिसने धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन (EBT) के कारण ₹50,000 तक का नुकसान उठाया है, वह अपने कुल नुकसान का 85% या अधिकतम ₹25,000 (जो भी कम हो) मुआवजा पाने का पात्र होगा। ग्राहक अपने पूरे जीवनकाल में केवल एक बार इस सुविधा का लाभ उठा सकता है।
- ₹29,412 से कम के नुकसान पर: यदि धोखाधड़ी की राशि ₹29,412 से कम है, तो ग्राहक को सीधे तौर पर नुकसान की कुल राशि का 85% मुआवजा दिया जाएगा।
मुआवजे की शर्तें
पीड़ितों को इस योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना होगा:
- समय सीमा: धोखाधड़ी होने के 5 कैलेंडर दिनों के भीतर इसकी शिकायत दर्ज करानी अनिवार्य है।
- बैंक की आंतरिक जांच: नुकसान की पुष्टि पीड़ित के बैंक की नीति में निर्धारित आंतरिक प्रक्रियाओं के अनुसार होनी चाहिए।
मुआवजे का बंटवारा: कौन कितना वहन करेगा?
घोषित किए गए नए फॉर्मूले के तहत, ₹29,412 से कम के फ्रॉड के मामलों में (जहां ग्राहक को 85% मुआवजा मिलना है) खर्च का बँटवारा इस प्रकार होगा:
| लेनदेन का प्रकार | RBI का हिस्सा | पीड़ित के बैंक का हिस्सा | उस बैंक का हिस्सा जहां पैसा गया (Beneficiary Bank) |
| घरेलू फ्रॉड (Domestic) | 65% | 10% | 10% |
| अंतरराष्ट्रीय फ्रॉड (Cross-Border) | 65% | 20% | 0% |
बैंक की लापरवाही पर मिलेगा 100% मुआवजा
RBI ने स्पष्ट किया है कि यदि धोखाधड़ी बैंक की लापरवाही के कारण हुई है, तो बैंक को पीड़ित के पूरे नुकसान की भरपाई (100%) करनी होगी। निम्नलिखित स्थितियों को बैंक की लापरवाही माना जाएगा:
- इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन (EBT) के लिए उचित सुरक्षा तंत्र सुनिश्चित न करना।
- ₹500 से अधिक के EBT के लिए अनिवार्य अलर्ट (SMS/Email) न भेजना।
- ग्राहकों की शिकायतों के लिए 24×7 चैनल (हेल्पलाइन/पोर्टल) उपलब्ध न कराना।
- बैंकिंग सिस्टम में खराबी या सुरक्षा में सेंध (Security Breach) लगना।
- ग्राहक की शिकायत पर तत्परता से कार्रवाई न करना।
शिकायत निपटारे की समय-सीमा
नई रूपरेखा के अनुसार बैंकों के लिए शिकायतों का निपटारा करना अनिवार्य कर दिया गया है:
- घरेलू धोखाधड़ी (Domestic EBT): शिकायत दर्ज होने के 45 कैलेंडर दिनों के भीतर।
- अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी (Cross-Border EBT): शिकायत दर्ज होने के 60 दिनों के भीतर।




