नासा का चंद्र रॉकेट ‘आर्टेमिस II’ लॉन्च: 54 वर्षों में पहली बार चंद्रमा के लिए मानव मिशन
नासा का चंद्र रॉकेट आर्टेमिस II 1 अप्रैल 2026 (अमेरिकी समयानुसार) को लॉन्च किया गया, जो लगभग 54 वर्षों में पहली बार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की ओर ले जा रहा है। दिसंबर 1972 के अपोलो 17 मिशन के बाद यह पहली बार है जब इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (lower Earth orbit) से बाहर निकला है।
यह सफल लॉन्च नासा के अंतरिक्ष यात्रियों रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) के जेरेमी हैनसन के लिए लगभग 10 दिवसीय मिशन की शुरुआत है। आर्टेमिस II मिशन चंद्रमा पर लैंड नहीं करेगा, बल्कि उसकी परिक्रमा करके 10 दिनों की यात्रा के बाद पृथ्वी पर वापस लौट आएगा। इसके बाद का मिशन (आर्टेमिस-III), जो 2028 के लिए नियोजित है, चार अंतरिक्ष यात्रियों के एक अन्य समूह के साथ चंद्रमा पर लैंडिंग करने के लिए निर्धारित है।
नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम के पहले मानवयुक्त मिशन के रूप में, इसके उद्देश्यों में चालक दल के साथ पहली बार लाइफ सपोर्ट सिस्टम का प्रदर्शन करना और भविष्य के मंगल मिशनों से पहले चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति की नींव रखना शामिल है। आर्टेमिस II मिशन स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट का उपयोग करता है और इसके क्रू कैप्सूल का नाम ओरियन (Orion) है।
SLS रॉकेट ओरियन को चंद्रमा के सुदूर हिस्से (far side) के चारों ओर एक ‘फ्री-रिटर्न प्रक्षेपवक्र’ (free-return trajectory) में धकेलेगा, जो चंद्रमा की सतह से लगभग 7,500 किमी की दूरी तक पहुंचेगा, जिसके बाद पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण उन्हें वापस खींच लेगा और वे प्रशांत महासागर में उतरेंगे (splash down)। आर्टेमिस II चंद्रमा पर स्थायी बेस बनाने की नासा की भव्य योजनाओं की पहली कड़ी है। यह अंतरिक्ष कार्यक्रम 2028 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग का लक्ष्य बना रहा है।
आर्टेमिस समझौता
आर्टेमिस समझौता (Artemis Accords): ये 2020 में अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा स्थापित स्वैच्छिक सिद्धांतों का एक समूह है, जो चंद्रमा, मंगल और अन्य खगोलीय पिंडों के सतत और शांतिपूर्ण नागरिक अंतरिक्ष अन्वेषण का मार्गदर्शन करते हैं। 1967 की बाह्य अंतरिक्ष संधि (Outer Space Treaty) पर आधारित ये समझौते पारदर्शिता, अंतर-संचालनीयता (interoperability) और जिम्मेदार अंतरिक्ष संचालन को बढ़ावा देते हैं। भारत 21 जून, 2023 को आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला 27वां देश बना। हालांकि, भारत नासा के नेतृत्व वाले ‘आर्टेमिस प्रोग्राम’ का हिस्सा नहीं है, जो मनुष्यों को चंद्रमा और उससे आगे ले जाने की नासा की एक मिशन-आधारित पहल है।


