फाइटोरिमेडिएशन क्या है?

अहमदाबाद का कांकरिया कोचिंग डिपो अपनी अभिनव जल संरक्षण विधियों के कारण भारत का पहला ‘वाटर-न्यूट्रल’ रेलवे डिपो बनकर उभरा है। इस उपलब्धि के पीछे मुख्य तकनीक फाइटोरिमेडिएशन (Phytoremediation) है।

नीचे इस तकनीक और इसकी कार्यप्रणाली का विस्तृत विवरण दिया गया है:

फाइटोरिमेडिएशन क्या है?

यह एक पर्यावरण के अनुकूल तकनीक है जिसमें पौधों का उपयोग प्रदूषित वातावरण (मिट्टी, तलछट या भूजल) को साफ करने के लिए किया जाता है। यह धातु, कीटनाशक, तेल और विस्फोटक जैसे प्रदूषकों को हटाने में सक्षम है।

जब पौधे अपनी जड़ों के माध्यम से पानी और पोषक तत्व लेते हैं, तो वे हानिकारक रसायनों को भी सोख लेते हैं या उन्हें तोड़ देते हैं। पौधे निम्नलिखित प्राकृतिक प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं:

  • भंडारण (Storage): प्रदूषकों को जड़ों, तनों या पत्तियों में जमा करना।
  • रूपांतरण (Conversion): हानिकारक रसायनों को कम हानिकारक रसायनों में बदलना। यह पौधे के भीतर या जड़ों के पास वाले हिस्से (root zone) में होता है।
  • वाष्पीकरण (Vaporization): रसायनों को वाष्प में बदलकर हवा में छोड़ना।
  • अवशोषण और सूक्ष्मजीव (Sorption & Microbes): प्रदूषक पौधों की जड़ों से चिपक जाते हैं, जहाँ मिट्टी में रहने वाले सूक्ष्मजीव (जैसे बैक्टीरिया) उन्हें कम हानिकारक रसायनों में तोड़ देते हैं।

हाइड्रोलिक कंट्रोल और निर्मित वेटलैंड्स: फाइटोरिमेडिएशन का उपयोग प्रदूषित भूजल की गति को धीमा करने के लिए भी किया जाता है:

  • हाइड्रोलिक कंट्रोल: पेड़ एक ‘पंप’ की तरह काम करते हैं, जो भूजल को अपनी जड़ों के माध्यम से ऊपर खींचते हैं। इससे प्रदूषित पानी साफ क्षेत्रों की ओर नहीं जा पाता।
  • निर्मित वेटलैंड्स (Constructed Wetlands): यह भी फाइटोरिमेडिएशन का एक रूप है, जिसका उपयोग कांकरिया डिपो जैसे स्थानों पर अपशिष्ट जल को शुद्ध करने के लिए किया जा रहा है।

सीमाएँ: यह तकनीक उन स्थानों पर सबसे अच्छा काम करती है जहाँ प्रदूषण का स्तर कम या मध्यम हो। यदि प्रदूषकों की सांद्रता बहुत अधिक है, तो यह पौधों की वृद्धि को रोक सकती है और सफाई की प्रक्रिया में बहुत अधिक समय लग सकता है। इसके अलावा, पौधे केवल उतनी ही गहराई तक सफाई कर सकते हैं जहाँ तक उनकी जड़ें पहुँचती हैं।

error: Content is protected !!