कांकरिया भारत का पहला वॉटर न्यूट्रल रेलवे डिपो बना

अहमदाबाद का कांकरिया कोचिंग डिपो भारत का पहला ‘वाटर-न्यूट्रल’ (जल-तटस्थ) रेलवे डिपो बन गया है। अपशिष्ट जल (wastewater) के अभिनव उपचार और पुन: उपयोग के माध्यम से इस डिपो ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

नियमित कोच धोने और रखरखाव गतिविधियों के दौरान उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट जल को उपचारित और पुनर्चक्रित (Recycle) करके, यह डिपो अब प्रतिदिन लगभग 1.60 लाख लीटर पानी बचा रहा है—जो 300 से अधिक घरेलू टंकियों के बराबर है।

मुख्य तकनीक: फाइटोरिमेडिएशन (Phytoremediation)

इस परिवर्तन के केंद्र में फाइटोरिमेडिएशन तकनीक को अपनाना है। यह एक पर्यावरण के अनुकूल तकनीक है जिसमें पौधों का उपयोग करके अपशिष्ट जल को शुद्ध किया जाता है।

बहु-चरणीय शोधन प्रक्रिया:

  • वेटलैंड-आधारित उपचार (Wetland-based Treatment): सबसे पहले अपशिष्ट जल को इस प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जहाँ विशेष पौधे अशुद्धियों को सोख लेते हैं और पानी की गुणवत्ता में सुधार करते हैं।
  • फिल्ट्रेशन (Filtration): इसके बाद, उपचारित पानी को कार्बन और सैंड (रेत) फिल्टर से गुजारा जाता है।
  • यूवी कीटाणुशोधन (UV Disinfection): अंतिम चरण में, पराबैंगनी किरणों (UV) के माध्यम से पानी को कीटाणुरहित किया जाता है ताकि इसे पुन: उपयोग के लिए सुरक्षित बनाया जा सके।

महत्वपूर्ण प्रभाव:

  • वार्षिक बचत: इस प्रणाली से प्रति वर्ष अनुमानित 5.84 करोड़ लीटर पानी की बचत होगी।
  • एक मॉडल के रूप में: कांकरिया डिपो को अब भारतीय रेलवे के भीतर कुशल जल प्रबंधन के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो रेलवे परिचालन में ताजे जल संसाधनों पर निर्भरता को कम करने में मदद करेगा।
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