विधानसभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश (UT)” मॉडल

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के रुख को दोहराते हुए राज्य के विशेष दर्जे (Special Status) की बहाली की मांग की। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने पुरजोर वकालत की कि “विधानसभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश (UT)” वाले मॉडल को संविधान से पूरी तरह समाप्त कर दिया जाना चाहिए।

केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासनिक ढांचा: एक नजर

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासन राष्ट्रपति द्वारा चलाया जाता है। राष्ट्रपति अपनी इच्छानुसार एक प्रशासक (Administrator) की नियुक्ति करते हैं, जिसके माध्यम से वहां की शासन व्यवस्था संचालित होती है।

  • उपराज्यपाल (Lieutenant Governors): अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी के प्रशासकों को ‘उपराज्यपाल’ के रूप में नामित किया जाता है।
  • प्रशासकों की दोहरी भूमिका: पंजाब के राज्यपाल ही चंडीगढ़ के प्रशासक होते हैं। इसी तरह, दादरा और नगर हवेली के प्रशासक ही दमन और दीव का कार्यभार भी संभालते हैं। लक्षद्वीप के लिए एक अलग प्रशासक की व्यवस्था है।

विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 239A कुछ विशेष केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्थानीय विधायिका (Legislature) या मंत्रिपरिषद, या दोनों के निर्माण का प्रावधान करता है। वर्तमान में भारत में केवल तीन ऐसे केंद्र शासित प्रदेश हैं जहाँ अपनी विधानसभा और मंत्रिपरिषद है:

  1. दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र): अनुच्छेद 239AA के तहत।
  2. पुडुचेरी: अनुच्छेद 239A के तहत।
  3. जम्मू और कश्मीर: अनुच्छेद 239A के तहत।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का तर्क है कि इस सीमित शक्ति वाले ढांचे के बजाय जम्मू-कश्मीर को उसका पूर्ण राज्य का दर्जा और विशेष संवैधानिक अधिकार वापस मिलने चाहिए।

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