मलक्का जलडमरूमध्य
इंडोनेशिया के वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की उनकी कोई योजना नहीं है। यह स्पष्टीकरण उनके द्वारा अप्रैल 2026 में इस रणनीतिक समुद्री मार्ग के मुद्रीकरण (monetising) को लेकर दी गई टिप्पणियों से मचे हंगामे के बाद आया है।
मध्य पूर्व में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण एशिया के नीति निर्माताओं को अन्य व्यस्त समुद्री मार्गों (chokepoints) की सुरक्षा पर सवालों का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी ऊर्जा प्रशासन (U.S. Energy Administration) द्वारा दुनिया के सबसे बड़े “तेल पारगमन चोकपॉइंट” के रूप में वर्णित 900 किलोमीटर (550 मील) लंबा मलक्का जलडमरूमध्य, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर से घिरा है। यह पूर्वी एशिया से मध्य पूर्व और यूरोप के लिए सबसे छोटा समुद्री मार्ग प्रदान करता है।
मलेशिया के समुद्री विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में मलक्का जलडमरूमध्य से 1,02,500 से अधिक जहाज गुजरे, जो 2024 के लगभग 94,300 जहाजों से अधिक है। इनमें से अधिकांश वाणिज्यिक जहाज थे।
यह मार्ग अंडमान सागर (हिंद महासागर) और दक्षिण चीन सागर (प्रशांत महासागर) को जोड़ता है। सिंगापुर जलडमरूमध्य के फिलिप्स चैनल में अपने सबसे संकरे बिंदु पर, मलक्का जलडमरूमध्य केवल 2.7 किलोमीटर चौड़ा है, जो एक प्राकृतिक बाधा पैदा करता है। इससे जहाजों की टक्कर, उनके फंसने या तेल रिसाव की संभावना बनी रहती है।
हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर के बीच संपर्क के रूप में, मलक्का जलडमरूमध्य भारत और चीन के बीच सबसे छोटा समुद्री मार्ग है और इसलिए यह दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग चैनलों में से एक है।


