कैप्टागन के खिलाफ ऑपरेशन रेजपिल
केंद्रीय गृह मंत्री ने 16 मई को ₹182 करोड़ के मूल्य के एक ऑपरेशन में कैप्टागन (Captagon) की भारत की पहली जब्ती की घोषणा की, जो कि एक प्रतिबंधित सिंथेटिक उत्तेजक (स्टिमुलेंट) है और जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अक्सर “जिहादी ड्रग” कहा जाता है। यह जब्ती “ऑपरेशन रेजपिल” (Operation Ragepill) के तहत की गई थी। यह मादक पदार्थ विरोधी अभियान में केंद्र की एक बड़ी उपलब्धि थी। यह खेप मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) के लिए भेजी जा रही थी।
कैप्टागन एम्फ़ैटेमिन-प्रकार का एक प्रतिबंधित सिंथेटिक मादक पदार्थ है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित अपराध नेटवर्कों और पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में संघर्ष क्षेत्रों से जुड़ा रहा है। कैप्टागन ऐतिहासिक रूप से फेनेथिलाइन (Fenethylline) से जुड़ा एक स्ट्रीट नाम है, जो पहली बार 1960 के दशक में विकसित एक सिंथेटिक मादक पदार्थ है। इसे मूल रूप से ध्यान संबंधी विकारों (अटेंशन डिसऑर्डर) और नार्कोलेप्सी जैसी चिकित्सीय विकारों के लिए निर्धारित किया गया था, लेकिन इसके अत्यधिक नशे की लत और दुरुपयोग की संभावना के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
इसे “जिहादी ड्रग” उपनाम इसलिए मिला क्योंकि कथित तौर पर आतंकवादी समूहों (जैसे कि आईएसआईएस) ने इसका दुरुपयोग लड़ाकों को युद्ध में बढ़ी हुई ऊर्जा, सहनशक्ति और डर की भावना को कम करने के लिए किया है। इसे “गरीबों का कोकीन” भी कहा जाता है।


