मनोनीत सदस्य हरिवंश लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गए

मनोनीत सदस्य हरिवंश नारायण सिंह लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गए हैं। वह इस उच्च पद पर आसीन होने वाले पहले मनोनीत सदस्य बन गए हैं। उनका चुनाव निर्विरोध हुआ।

सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने हरिवंश को उच्च सदन का उपसभापति चुनने का प्रस्ताव रखा। उल्लेखनीय है कि इस महीने की 9 तारीख को हरिवंश का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उपसभापति का पद रिक्त हो गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की सेवानिवृत्ति से रिक्त हुए पद पर उन्हें सदन के लिए मनोनीत किया था।

राज्यसभा उपसभापति

अनुच्छेद 89(2): भारत के संविधान के अनुसार, राज्यसभा यथाशीघ्र अपने किसी सदस्य को उपसभापति चुनेगी और जब भी यह पद रिक्त होगा, सदन किसी अन्य सदस्य को इस पद के लिए चुनेगा।

इस पद का कार्यकाल छह वर्ष का होता है (या तब तक, जब तक उनकी सदस्यता समाप्त नहीं हो जाती) और सदन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी इन्हीं की होती है।

मनोनीत सदस्य (अनुच्छेद 80):

राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 सदस्यों को निर्वाचित सदस्यों के समान ही संसदीय विशेषाधिकार, उन्मुक्तियाँ और कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार प्राप्त होता है।

मतदान का अधिकार: वे संविधान संशोधनों सहित सभी मामलों में मतदान कर सकते हैं। हालांकि, वे राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते, लेकिन उपराष्ट्रपति के चुनाव में उन्हें वोट देने का अधिकार है।

राजनीतिक दल में शामिल होना (अनुच्छेद 99): एक मनोनीत सदस्य को अपनी सीट ग्रहण करने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के लिए छह महीने का समय दिया जाता है।

दलबदल कानून (दसवीं अनुसूची): यदि कोई मनोनीत सदस्य छह महीने की अवधि बीत जाने के बाद किसी दल में शामिल होता है, तो वह सदन की सदस्यता खो देता है।

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