मांडू के बाओबाब पेड़ के फल ‘खुरासानी इमली’ को GI टैग प्राप्त हुआ
मांडू के आइकोनिक बाओबाब पेड़ के फल, जिसे स्थानीय रूप से ‘खुरासानी इमली’ (Khurasani Imli) के नाम से जाना जाता है, ने भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त कर लिया है। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से इस प्रजाति की विरासत सुरक्षित होगी और उन आदिवासी समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे जिन्होंने पीढ़ियों से इसे संजोकर रखा है। इस प्रमाणन से इसकी ब्रांडिंग और व्यावसायिक संभावनाओं को मजबूती मिलेगी। अब, खुरासानी इमली के उत्पादों को उनके विटामिन और पोषक तत्वों के आधिकारिक चिह्नों (मार्किंग) के साथ बेचा जाएगा। जीआई टैग मिलने के बाद पर्यटक भी इसमें खासी रुचि लेंगे।
भारत में बाओबाब पेड़ का इतिहास और विशेषताएँ
माना जाता है कि बाओबाब पेड़ (Adansonia digitata) को लगभग छह शताब्दियों पहले अफगान और अरब व्यापारियों द्वारा मांडू में लाया गया था; यह भारत की मूल (indigenous) प्रजाति नहीं है। समय के साथ, यह प्रजाति इस क्षेत्र की जलवायु और भूभाग के अनुकूल ढल गई, जिससे मांडू देश में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले बाओबाब पेड़ों के सबसे बड़ा केंद्र बन गया। अपने विशाल आकार, पानी जमा करने वाले तनों और विशिष्ट शाखाओं की संरचना—जो एक उल्टे पेड़ की तरह दिखती है—के लिए जाने जाने वाले बाओबाब इस क्षेत्र के सबसे पहचाने जाने वाले पहचानों में से एक बन गए हैं।
बाओबाब पेड़ से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:
- मूल और वर्गीकरण: बाओबाब पेड़ (Adansonia digitata) अफ्रीका मूल का पेड़ है और यह ‘माल्वेसी’ (Malvaceae) परिवार से संबंधित है।
- नाम का अर्थ: बाओबाब नाम अरबी शब्द “बू हिबाब” (bu hibab) से लिया गया है, जिसका अर्थ है “कई बीजों वाला फल”।
- वैज्ञानिक नाम का इतिहास: इस पेड़ का नाम फ्रांसीसी वनस्पतिशास्त्री मिशेल एडन्सन (Michel Adanson) की स्मृति में रखा गया है, जिन्होंने सेनेगल के प्राकृतिक इतिहास का अध्ययन किया था, जबकि ‘डिजिटाटा’ (digitata) इसके हाथ के आकार के पत्तों को संदर्भित करता है।
- प्रजातियां और जीवनकाल: दुनिया भर में Adansonia की आठ प्रजातियाँ हैं, जो अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में पाई जाती हैं। इस पेड़ की व्यापक जड़ प्रणाली इसे फलने-फूलने में मदद करती है और माना जाता है कि कुछ बाओबाब पेड़ 5,000 साल तक जीवित रहते हैं।
- असाधारण सहनशीलता: बाओबाब के पेड़ अविश्वसनीय रूप से लचीले और प्रतिरोधी होते हैं, जो आग, दीमक और सूखे का भी सामना कर सकते हैं।
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