जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी 2026
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 25 जून 2026 को दक्षिण कोरिया में आयोजित ‘जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी 2026’ (Jeju Forum for Peace and Prosperity 2026) को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने वर्तमान वैश्विक चुनौतियों, बदलती राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर भारत का स्पष्ट रुख रखा। डॉ. जयशंकर ने रेखांकित किया कि आज की दुनिया कई नए और गंभीर दौर से गुजर रही है:
- हथियारों का बढ़ता प्रभाव और जोखिम: दुनिया में हर चीज़ (चाहे वह तकनीक हो या सप्लाई चेन) का राजनीतिकरण और सैन्यीकरण बढ़ रहा है, जिससे देशों के बीच जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
- सोशल मीडिया युग की राजनीति: आज की वैश्विक राजनीति सोशल मीडिया के दौर के अनुकूल हो गई है, जहाँ मतभेदों को कम करने के बजाय उन्हें और अधिक उभारने की कोशिश की जाती है।
- संकोच रहित शक्ति प्रदर्शन: देश अब अपनी क्षमताओं और ताकतों का इस्तेमाल करने में पहले से कहीं कम हिचकिचा रहे हैं। यहाँ तक कि तकनीकी प्रगति भी अनजाने में इन नकारात्मक प्रवृत्तियों को बढ़ावा दे रही है।
संकटों से निपटने के लिए बहुपक्षीय सहयोग की मांग
वैश्विक चुनौतियां किसी एक देश की नहीं: विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि कोविड-19 जैसी महामारी, आतंकवाद की घटनाएं या चरम जलवायु परिवर्तन जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना कोई भी देश अकेले नहीं कर सकता। इसके लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है।
वैश्विक व्यवस्था को स्थिर करने के लिए उन्होंने दो प्रमुख उपाय सुझाए:
- प्रभावशाली देशों के बीच निकटता: दुनिया के प्रभावशाली देशों के बीच एक नई समझ और करीबी रिश्ते विकसित होने चाहिए, जो वैश्विक संतुलन बनाए रखने के लिए ज़रूरी हैं।
- मुद्दों के आधार पर साथ आना: दुनिया को अब किसी एक स्थायी गुटबाजी के बजाय ‘एजेंडा-विशिष्ट सहयोग’ (विशिष्ट मुद्दों या समस्याओं के समाधान के लिए मिलकर काम करना) की तरफ बढ़ना चाहिए ताकि वैश्विक समस्याओं का त्वरित समाधान निकाला जा सके।
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