CJI ने सबसे पुराने लंबित मामलों की विशेष रूप से सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट की चार समर्पित बेंच गठित की

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सबसे पुराने लंबित दीवानी (सिविल) और आपराधिक (क्रिमिनल) मामलों की विशेष रूप से सुनवाई करने के लिए चार विशिष्ट पीठों (बेंचों) का गठन किया है। यह सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दशकों से लंबित विवादों के निपटारे को सुनिश्चित करने का एक व्यवस्थित प्रयास है।

ये विशेष पीठ “गैर-विविध दिवसों” (non-miscellaneous days) यानी मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को कार्य करेंगी। सर्वोच्च न्यायालय की शब्दावली में, सोमवार और शुक्रवार “विविध दिवस” (miscellaneous days) होते हैं, जो नए मामले दर्ज करने और प्रारंभिक सुनवाई के लिए आरक्षित होते हैं। सप्ताह का मध्य भाग “नियमित मामलों” (regular matters) के लिए होता है, जिनमें विस्तृत और लंबी बहस की आवश्यकता होती है। इन चार पीठों को विविध मामलों की सुनवाई के नियमित बोझ से मुक्त करके, अदालत अपने सबसे लंबे समय से लंबित मामलों पर बिना किसी बाधा के न्यायिक ध्यान केंद्रित कर सकेगी।

राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (National Judicial Data Grid) के अनुसार, वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में 96,045 मामले लंबित हैं। इस बोझ का अधिकांश हिस्सा दीवानी मामलों का है, जिनकी संख्या 74,244 है, जबकि शेष 21,801 आपराधिक मामले हैं। इस बैकलॉग में 24 दीवानी मामले और दो आपराधिक मामले ऐसे हैं जो पिछले 30 से अधिक वर्षों से अदालत के समक्ष लंबित हैं। सबसे पुराना दीवानी मामला 1986 से लंबित है, जबकि सबसे पुराना आपराधिक मामला 1991 में दर्ज किया गया था।

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